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Wednesday, August 17, 2022

याद करो कि भूल जाओ

 सफर जारी है....... 1013

02.08.2022

 याद करो कि भूल जाओ .....

ज़िंदगी को जिंदादिली से जीना सीखना पड़ता है। पर लोग साधन और अवसरों के अभाव का बयान करते  हमेशा रोते झींकते रहते हैं और अच्छी भली ज़िंदगी को बोझिल और नीरस बना लेते हैं। बड़े बड़े महापुरुषों की आत्मकथा और जीवनी पढ़ते बोध हुआ कि न तो कोई धन से बड़ा होता है और न पद से। वे जो आज सफलता के शिखर पर परचम लहरा रहे हैं, उन्होंने ऐसा कुछ विशेष जरुर किया है जिसे अन्य नहीं कर पाए। उपाधि और योग्यता किसी कार्य क्षेत्र में प्रवेश करने का माध्यम भले हो, पर उस क्षेत्र में जमे रहने के लिए ,बने रहने के लिए निरंतर अध्यवसाय करना होता है, चिंतन करते हर पल अपने को मांजना होता है, हर दिन कुछ नया सीखना होता है, अपने अनुभव के दायरे को बढ़ाना होता है। सहयोगियों से मिलना जुलना होता है, उनकी समस्याओं के समाधान खोजने होते हैं, उन्हें लगनशील बनाना होता है, उन्हें अपडेट रखने के लिए समय समय पर नवीकरण कार्यक्रम आयोजित करने होते हैं। उनसे जुड़ना होता है। यदि हार हो तो उसका जिम्मा स्वयं लेना होता है और जीत हो तो क्रेडिट टीम को देना होता है। पूर्व राष्ट्रपति मिसाइल मैन अब्दुल कलाम का अनुभव तो यही बयान करता है।

जिंदगी एक कोरा कागज है जिस पर आप चाहे जैसी चित्रकारी कर सकते हो। चाहो तो खूब फूल पत्ती बनाओ और उसमें मनचाहे रंग भरो या उल्टी सीधी रेखाएं खींचो, उन्हें मिटाओ, फिर पेंसिल चलाओ, जैसी चाहो आकृति बनाओ और रंग छिटकाओ। चाहो तो किसी को अपनी निजता में शमिल करो, उससे अपने सुख दुख शेयर करो या सूमसाम से बैठे खीझते रहो, जो पास है उसे देखो मत, नजर अंदाज़ करो और जो नहीं है उसे लेकर शिकायती स्वर बनाए रखो। जो अपने हैं उनकी ओर से निगाह फेर लो और दूसरे गांव में जा के अजनबियों से रिश्तेदारी जोड़ो।

भाई मेरे,ये जीवन है। हर पल नए अनुभव नए लोग ज़िंदगी के खाते में जुड़ते जाते हैं, कुछ से यारी दोस्ती हो जाती है तो कुछ को भूलभाल जाते हैं। जो आज निजी की श्रेणी में हैं वे कल दूसरी पाली में चले जाते हैं। जिनसे आज दांत काटी रोटी है, जो लंगोटिया यार है, वे कल कट्टर शत्रु हो जाते हैं। कुछ याद रह जाते हैं कुछ बिलट जाते हैं। अब स्मृति भी बेचारी क्या करे, उस की अपनी सीमा है। सो जो अनुपयोगी हो जाते हैं, प्राथमिकता के पहले पायदान पर नहीं रह पाते, जो अब काम के नहीं है, वे मोटी मोटी फाइलों में टैग कर रिकार्ड के तौर पर रख लिए जाते हैं और वक्त जरूरत खंगाल लिए जाते हैं। अब जो बिल्कुल ही काम के नहीं रह जाते, वे मैमोरी से डिलीट ही कर दिए जाते हैं ।सो जो किसी के ध्यान में बने रहना चाहते हो, नजरों में चढ़े रहना चाहते हो तो अपने को अपडेट किए रखो। उसकी आवश्यकताओं के अनुरूप अपने में अदल बदल करते रहो।

ये जो दिन भर फिल्मी गाने सुनते रहते हो.. भूल गया सब कुछ, याद नहीं अब कुछ या नाम गुम जाएगा, चेहरा ये बदल जाएगा, तेरी आवाज़ ही पहचान है गर जो याद रहे सब झूठ थोड़े ही होते हैं। सबका अपना अपना समय है, कोई जीवन के प्रारंभ में लाइम लाइट में आ जाता है तो कोई मध्य भाग में और कोई दुनिया से जाते जाते जुगनू सा चमक जाता है। सो समय का इंतजार करो, समय के साथ साथ चलो, आज हो कल नहीं होगे, भुला बिसरा दिए जाओगे। आज सबकी नज़र में हो भी, तो इसमें तुम्हारा भला है क्या। जन्म माता पिता ने दिया, नाम उन्होंने दिया, पालन पोषण उन्होंने किया, शिक्षा गुरुओं ने दी, सामाजिकता का पालन उन्होंने सिखाया, समय समय पर वे तुम्हें थामे रहे, और आज जब तुम्हारी करने की बारी आई तो पतली गली से खिसकने के मूड में आ गए, मुंह में गज भर की जुबान आ गई कि तुमने हमारे लिए किया ही क्या है। ऐसा ही होता है, ऐसे ही कहा जाता है।

जिंदगी में समत्व बहुत जरुरी है, ये सुख दुख मौज मस्ती कठिनाई परेशानी आज है कल नहीं होगी। तो कभी याद किए जाओगे और कभी भुला बिसरा दिए जाओगे।

इत्ते उलायती हू मत बनो

 सफर जारी है....1533 18.06.2024 इत्ते उलायती हू मत बनो.... बिन पे तो मैया की कोख में हू नौ माह नाय टिको गयो,दुनिया देखबे की उलायत लग रही.पडब...