Showing posts with label चेहरे ऊपर चेहरा. Show all posts
Showing posts with label चेहरे ऊपर चेहरा. Show all posts

Sunday, August 28, 2022

चेहरे ऊपर चेहरा

 सफर जारी है....1039

29.08.2022

चेहरे ऊपर चेहरा ....

कुछ लोगों से मिलते जुलते ये पंक्ति बार बार दिमाग में गूंजती हैं ... एक चेहरे पे कई चेहरे लगा लेते हैं लोग। उनके चहरे के नित नए बदलते चेहरे को देख ये निश्चित करना बहुत मुश्किल हो जाता है कि आखिर असली चेहरा है कौन सा। मिलते हर रोज़ हैं पर एक बदले चेहरे के साथ । मन होता हैं इनके चहरे के सारे नकाब नोंच कर अलग फैंक दिए जाएं और असली चेहरे का सच सबके सामने ले आया जाए। पता तो लगे लोगों को कि ऐसे सीधे सादे दिखने वाले चेहरे के पीछे का सच क्या है। अंदर कुछ बाहर कुछ होते हैं। जैसे ही सामाजिकता का दबाब हटा, अपने मूल रुप में आ जाते हैं। लोगों से मिलते ही मेकअप किए चेहरे के साथ हैं इसलिए ऐसों की सोशल इमेज कहीं अलग होती है। वे जमाने भर के लिए भले ओर दयालु होते हैं वही जिसके होते हैं उसके लिए खौफ बने रहते हैं। एक झूठ पर पर्दा डालने को अनेक नए झूठ खडे कर लेते हैं। जो कहते हैं वह करते नहीं और जो करते हैं उसका कोई जिकरा नहीं होता। बस हाथी की तरह के खाने और दिखाने के दो सेट रखते हैं। मन में कुछ और चलता रहता है पर वाणी कुछ और कहती है इसलिए अक्सर शब्द हावभाव के साथ संतुलन नहीं बिठा पाते। यदि वे इन मामलों के उस्ताद न हों तो,बहुत शातिर न हों तो चोरी हाल पकड़ में आ जाती है। चोर की दाढ़ी में तिनका ऐसे ही थोड़े कहा गया होगा। वे चोर को चोरी के लिए उकसाते हैं और पहरेदार के साथ मिलकर जागते रहो की आवाज भी लगाते रहते हैं। वे अपने बेहद निजी लोगों को पहले से ही समझाए होते हैं कि समाज में इज्जत बनी रहे तो सबके सामने झूठ मूठ डाटूगा भी और दो चार थाप भी लगाऊंगा , पर तुम बुरा मत मानना। ये तो लोगों को दिखाने के लिए हैं। करना वही जो चाहते हो, मेरी पूरी सहमति है पर दुनियां दिखाने के लिए तो ये छद्म व्यवहार किए ही जाते हैं।

अब इतने ही समझदार होते, दुनिया की असलियत जानते तो लोगों को समझने में बार बार  गच्चा क्यो खा जाते। अब कोई बड़ी बड़ी बातें कर रहा है तो वैसा आचरण भी होता होगा। हमें क्या पता कि नौ सौ चूहे खा के बिल्लियां हज करने को जाया करती हैं, ये धर्म की आड़ में खेल खेला जा रहा है, कभी डिग्रीधारी के नाम पर कभी खानदान के नाम पर लोगो को बेवकूफ बनाने की मुहिम छिड़ी हुई है।मेकअप की आड़ में काले कारनामों को अंजाम दिया जा रहा है। अब तो ये खेल खुल्लम खुल्ला और खेला जा रहा है। लो उखाड़ लो हमारी मूछ पूंछ जो तुम पे उखाडी जाय। अरे हमारी ऊपर तक पहुंच है, सब काला पीला काले पीले को सफेद बुर्राक में बदलने की ताकत रखते हैं। और जो बार बार दंडाधिकारी से सजा दिलाने का सपना पाले बैठे हो, कभी पूरा नहीं होने का। ऐसों को तो हम अपनी जेब में रखते हैं, ऐसे तो हमारे तलवे चाटते हैं, ज्याड़ बक बक करे तो रुपयों की गड्डी से उसका मुंह बंद कर दिया जाता है। पैसे में तो बड़ी ताकत है साब, पैसा फेंको तमाशा देखो। धन तो अच्छों अच्छों के ऐब ढक देता है। काले किसट्ट उल्टे तवे को भी पैसों का मुलम्मा चढ़ा कर दूध सा उजला और एकदम भक्क सफेद दिखाया जा सकता है।

क्यों इतना नाटक करते हो, छद्म ओढ़े रहते हो, अरे जो हो वही बने रहो, जो यथार्थ में हो वैसे ही दिखने चाहिएं। ये ओढ़े गए मोटे बोरे से लबादे बहुत भरमाते हैं। असल को साफ छिपा जाते हैं। बस नकली मुखौटे की आड़ में सब चलता रहता है। लाख गलत और झूठे सही, सबकी निगाहों में पाक साफ बने रहते हो। गलत सलत करते हो और कह सुन कर, सिफारिश का दबाब डलवा कर सब रफा दफा करवा देते।अधिकारी की सही का ठप्पा लगाकर झूठ को ही सच प्रमाणित करवा लिया। अब तुम चाहे जैसे मरजी बने रहो, फाइल में तो अच्छा अच्छा रिकार्ड हो ही गया है। आधिकारी कौन दूध के धुले हैं, सो वे न कहने की हिम्मत जुटा ही नहीं पाते। और छोटे बड़े सब मिलकर घाल मेल करते रहे हैं। जब जब निबू की चूक खट्टी बूंद इन जैसों के सफेद उजले दूध की कढ़ाई में पड़ जाती है, दूध फट जाता है और सब दूध का दुध पाणी का पानी हो जाता है। ऐसे दस बीस सब सिस्टम में होते हैं जो उखाड़ पछाड़ में लगे रहते हैं और सात तहों में से भी सच खोज कर ले आते हैं। उन्हें सच को सच कहने और सही करने का ऐसा भूत चढ़ा हुआ है कि गलत के लिए अंतरात्मा गवाही नही देती और सच सामने आते ही सालों से बुने और बने  ढांचे टूट जाते हैं, एक सच कहते इसके उसके सबके बुरे बन जाते हैं। कोई विकल्प है क्या। हां हां क्यों नहीं, तुम भी चेहरे ऊपर चेहरा चस्पा कर लो और सब ऐसे ही चलने दो पर तुम्हारी अंतरात्मा इसके लिए कभी गवाही देगी नहीं। तुम तो लगातार सत्य की खोज में लगे रहोगे। लगे रहो, रोका किसने है पर इस सब के लिए बहुत सशक्त बनना होगा, संकल्प शील और दृढ़ प्रतिज्ञ रहना होगा, बार बार की चोट से टूटना नहीं, और मज़बूत बनना होगा। कर पाओगे ये सब तो नोच डालो सारे लबादों और नकाब पोशों को, उनके चेहरे नंगे कर दो, वे तिलमिलाएंगे, घोड़े से हिनहिनाएंगे, मक्खी से भिनभिनाएंगे जरूर पर तुम चुप बने रहना, करो अधिक पर कहो कुछ नहीं, मौन में बड़ी शक्ति होती है। और जो तुमसे ये सब न निठ पाए तो जैसा चल रहा है चलने दो, यथास्थिति बनी रहने दो।चलने दो वैसा ही जैसों सदियों से चला आ रहा है। बस अपना अपना देखो, मेरा तो हो गया कह कर तान चद्दर सोते रहो। अब तुम सोचो कि दोनों में से  करना क्या है। हम तो कल भी सच के साथ थे, आज भी हैं और भविष्य में भी ऐसे बने रह की उम्मीद है। नेक इरादे वाले के साथ भी कारवां जुड़ जाता है फिर देर भले हो। तो चेहरे पे चेहरे मत लगाते रहिए नहीं तो एक दिन असली चेहरा ही गायब हो जाएगा, अंतरात्मा की आवाज कानों तक नहीं पहुंचेगी। सब बिखर जाएगा, कुछ भी नही सिमटेगा तो नोच फैंकिए इन लबादे और झूठे मुखौटों को।

इत्ते उलायती हू मत बनो

 सफर जारी है....1533 18.06.2024 इत्ते उलायती हू मत बनो.... बिन पे तो मैया की कोख में हू नौ माह नाय टिको गयो,दुनिया देखबे की उलायत लग रही.पडब...