सफ़र जारी है....1027
17.08.2022
लोग लुगाई.........
चलो आज एक किस्सा सुनावे। बीच बीच में हूंकरा देते रहियो के पतो चलतो रए कि खर्राटे मार के सो रए हो कि और हम धकापेल बोले ई चले जा रए हैं।एक जे भरतार हते जैसे ई कछु बताबो शुरू करो, हां हूं करते हाल खर्राटे लेन लग जाएंगे और जो तुम चुप है जाओ तो जब उठिंगे के नींद बीद बिछुट जाएगी सोई किंगे का कह रई तुम, हां तो फिर का भयो, भयो तिहाओ सिर, हम का बेवकूफ हैं कि ऐसे ही बके जा रए हैं। नाय सुननी तो मत सुनो। काऊ और ए सुना लिंगे। तुमई नाय रए अनोते जो तुमसे सिर मारबो करें। अब बताओ जे कोई बात भई कि एक की तो कहानी खत्म होबे पे आई और सुनबैया जे पूछ रयो है का कह रई तुम। कह रए भाड़। हां नई तो।
हां तो तुम सुनो लल्लू, एक लोग लुगाई हते। लुगाई हती नेक तेज सो लोग ए अक्ल सिखाती रेती। अब कछु दिना तो लोग चुप रहयो कि कोऊ बात नाने, जे तो कहत रैत है, कह कबा के आपही चुप हे जाएगी। को मूड मारे जाते। बैयर बानी ऐसी ई होत हैं, इनकी बात पे का ध्यान देनो।मईया ई तो कहो कत्ती बाबन ते। सो लोग चुप लगा जातो।पर एक दिना तो हद्द है गई साब। लुगाई ने नेक ज्यादा लगाम कस दई ,कछु ज्यादा ही रिस हती तो करारी करारी दो चार बात सुना दई। लोग कू लग गईं बुरी सो द्वारी में खटिया डाल के पर गयो चुप्प, चद्दर से मोह ढाक लयो। काम बाम पे ना गयो ।अब लुगाई कैसे करे। बोलचाल बंद हती सो कैसे कहती। अब ज्यादा ई देर हे गई तो बाकी खटिया के लंग ई चक्कर काटे, कभू अंदर जाबे कभू बहार और कहे ...लोग गए लाई कू लोग चो न जाय। लाई कैत हैं रवी की फसल की कटाई कू। सो सबरे गांव के लोग चल दए अपने अपने काम पे और जे लोग रूठो मटको सो रिस है के परो है। और काम पे न जाएगो तो खायो का जाएगो। सो जा कड़ी खाए बजमाये ए कैसे हू उठानो तो परेगो ही परेगो। सो बार बार एक ही बात कहबे कि लोग गए लाई को लोग चो न जाए। सो रिसिया के लोग बोलो....
....लोग गए खाए के लोग का खाय। लुगाई रोटी पानी बना के निच्चू हती पर बोलचाल बंद है तो कैसे कहे सीधी सीधी कि आ जाओ खानो परसो धरो है, खा लेयो ।सो सुनाके बोली ....छींके ऊपर पई धरी है खाय चो न जाए। मतबल हमने तो बना के छींके पे धर दई है, ले ओ और खाओ और काम पे जाओ। दलिद्री सो चद्दर से मोड़ो ढापे परो है कि जा की खुशामद करो, लाट साहब तब खांगे। अब दोनों की रिस तो कम हेती जा रई सो लोग बोलो ...जो बोला चाली है ही गई तो दे ई चो न जाए । जब बोल चाल शुरू हे गई, मेल मिलाप है गयो तो तू ही चो न दे देती। सो फिर दोनो लोग लुगाई ने मिल के रोटी खाई, लोग चलो गयो काम पे और लुगाई लग गईं चौका बासन निपटाने में। है गयो किस्सा खतम। अब अपने अपने घर कू जाओ ,के जई बैठे हमाए प्रान पीओगे का।
दांपत्य जीवन में नोंक झोंक चलती रहती है, एक कह लेता है दूसरा सुन लेता है और कभी दूसरा गुस्से में होता है तो पहला चुप्पी साध लेता है। बस ये नोंकझोंक बनी रहे, सिर फुटबल्ल का रुप न ले कि दो पाट हो जाएं। यही जीवन है और ऐसे ही चलता है ।कभी एक शेर होता है तो कभी दूसरा बिल्ली, जब जिसका जैसा दांव पड़ लग जाए। तो चलते रहो, कहते सुनते रहो पर साथ बने रहो, जिंदगी ऐसे ही चलती है।