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Wednesday, April 27, 2022

रहें न रहें हम

 सफर जारी है....841

08.02.2022

सुर साम्राज्ञी लता जी का जाना सबको व्यथित कर गया।दिन भर उनके प्रशंसक शोक संवेदना प्रकट करते रहे, कुछ ने गीतों को दोहराया तो कुछ ने उनकी यादों को साझा किया।एक न एक दिन सबको जाना ही होता है, सब चले ही जाते हैं न लौटने के लिए पर कुछ दिलों में गहरे बस जाते हैं, अपनी छाप छोड़ जाते हैं और कुछ इतने चुपके से दुनिया छोड़ जाते हैं कि घर वालों को भी खबर नहीं होती।वे जीयें या मरे ,किसी को कोई फर्क नहीं पड़ता।कुछ की गिनती न मरों में होती है न जिंदो में, बस सांस चलने से पता लगता है कि वे हैं।कितने तो ऐसे हैं जिनके विषय में पता ही नहीं चलता कि वे कब आये और कब निकल लिये।मरना तो उनका है जो मरकर भी अमर हो जाते हैं।कुछ मर कर भी जी जाते हैं और कुछ जीते जी मर जाते हैं।जीना तो है उसी का जिसने ये राज जाना, है काम आदमी का दूजो के काम आना।जो ये राज जान लेते हैं वे जिंदगी जीना सीख जाते हैं।जो करते हैं पूरे मन से करते हैं,आत्मविश्वास से भरे होते है।उन्हें अपने पर भरोसा होता है।वे मन ही मन दोहराते रहते हैं आई कैन डू,आई विल डू।ऐसा नहीं कि वे हमेशा सफल ही होते हों, उन्हें भी कई कई बार असफलता का मुख देखना पड़ता है पर वे निराश होकर आत्महत्या का विकल्प नहीं चुनते, परिस्थितियों को हेंडिल करने का हुनर जानते हैं।शांत और गम्भीर रहकर लगातार अपने कार्य में लगे रहते हैं।बाधाएं आती हैं आती रहें,उनसे विचलित नहीं होते, हाथ पैर नहीं छोड़ देते, हिम्मत बनाये रखते हैं और आगे बढ़ते रहते हैं।

लीजेंडरी कोई एक दिन में नहीं बन जाता।वह लगातार बढ़ता रहता है।रोज अभ्यास करता है, अपनी कमियों को पहचानता है, उन्हें रेखांकित करता है, उनमें सुधार करता है, लगातार प्रतिदिन प्रतिपल और प्रतिक्षण सीखता और सीखता ही रहता है।अपनी उपलब्धियों पर गर्वित होता है लेकिन इतराता नहीं है।रोज तिल तिल जोड़ता है तब उपलब्धियों का पहाड़ बनता है।लगातार बांटता रहता है।खुशबू को कैद किया भी नहीं जा सकता, वह तो वातावरण में स्वत: बिखर जाती है, सबको सुगन्धित कर जाती है।लता जी की आवाज का जादू सिर चढ़ कर बोलता है।वे मन से गाती हैं, गीत में डूब कर गाती है, दिल की गहराइयों से गाती है और सुनने वाले के दिल पर अमिट छाप छोड़ जाती हैं।

जिनसे जिनसे मिली, मुलाकात यादगार बन गई।उनके ढेरो प्रशंसक अपनी अपनी मुलाकातों को शेयर कर रहे हैं।

           प्रतिभा किसी विशेष क्षेत्र की मोहताज नहीं हुआ करती।बस जिसमें जो है उसे निखारना होता है, परिमार्जित करना होता है, समय देना होता है, श्रम करना होता है, लगातार अभ्यास करना होता है, न दिन देखना होता है न रात।बस लग्न लग गई तो लग गई,सोते जागते उठते बैठते एक ही ख्याल एक ही विचार हावी रहता है।करना पड़ता है, अपने को झोंकना होता है, लगातार चलना होता है बिना रुके तब जाकर स्तम्भ खड़े होते है।तब जाकर लोगो के दिलों में प्रवेश मिलता है, तब जाकर लोग कंधे पर बिठाते हैं, आपको हाथोहाथ लेते हैं।प्रतिभाएं लगातार अभ्यास से निखरती हैं।लोगों के वजूद पर छा जाती हैं।वे भौतिक रूप से रहें न रहें पर सबके दिलों में महकती रहती हैं।वे स्वयम घोषणा कर देती हैं....रहें न रहें हम महका करेंगे बन के कली बन के सबा बाग-ए-वफ़ा में। सच वे महकते ही रहते हैं।लता जी आपके स्वर ने हम सबको बांध ही तो रखा है।आप करोड़ो दिलों में रहती हैं।कहते हैं कि कला देश की दीवारों के बंधन नहीं माना करती, खुशबू बिखरती है तो उसके लिए कोई बन्धन नहीं रहता।अयं निज परो वेति की गणना तो लघुचेतसाम किया करते हैं, आप जैसों के लिए तो वसुधा ही कुटुंब है।आपको खांचों में कहां सीमित किया जा सकता है।आप सबकी हैं और सब आपके।आपके गाये गीत अमर हैं।छब्बीस जनवरी पर सबने आपके गाये ए मेरे वतन के लोगों को दोहराया हैं।बच्चे बच्चे की जुबान पर आप गीत बनकर छाई हुई हैं।कहां भूली जा सकती हैं आप,आप तो हम सबके दिल में बसी हुई हैं।आपके गीत की पंक्तियों से ही आपको अश्रुपूरित विदा देते हैं रहें न रहें हम महका करेंगे बन के कली बन के सबा बाग -ए-वफ़ा में।

वहीं पे कहीं हम तुमसे मिलेंगे बन के कली बन के सबा बाग ए वफ़ा में।

इत्ते उलायती हू मत बनो

 सफर जारी है....1533 18.06.2024 इत्ते उलायती हू मत बनो.... बिन पे तो मैया की कोख में हू नौ माह नाय टिको गयो,दुनिया देखबे की उलायत लग रही.पडब...