Showing posts with label बस तेरा सहारा सच्चा है. Show all posts
Showing posts with label बस तेरा सहारा सच्चा है. Show all posts

Sunday, September 18, 2022

बस तेरा सहारा सच्चा है

 सफर जारी है.......1061

20.09.2022

बस तेरा सहारा सच्चा है........

मर्जी जितने सहयोगी हों, हाथ हों, मित्र हों, नाते रिश्तेदार हों पर मुसीबत में अपना आत्मविश्वास और बुद्धि ही काम आती है और वह बुद्धि, वह आत्मविश्वास, वह दृढ़ता, वह संकल्प शक्ति, वह निश्चयात्मकता, जो हाथ में लिया उसे पूरा करने का साहस, आत्मबल अपने अंदर से आता है चाहे कोई कितना भी समझाता क्यों न रहे। कभी कभी व्यक्ति पर अहंकार हावी हो जाता है कि मैं इतना बड़ा, मैं इतना प्रतिभाशाली, मैं ये भी कर सकता हूं, वह भी कर सकता हूं, सब मेरी मुठ्ठी में है, मैं ये करूं चाहे वो करूं, मेरी मर्जी। सब मुझसे गवर्न हों, मेरे कहे अनुसार चलें, और तो और प्रकृति भी मेरी अंगुली पर नाचे, सूरज तारे चंदा हवा पानी सब मेरे गुलाम हो जाएं। जब अहम का घेरा इतना बढ़ जाए तो भगवान जी बहुत जोर की पटखनी देते हैं, सारी अक्कल ठिकाने लग जाती है। हम मूर्खों को पता चल जाता है कि इस सृष्टि का नियामक तो कोई और है, नियंत्रित तो कहीं और से होते है, चाबी किसी और के हाथों में है। बस आप उतना ही चल सकते हैं जितनी चाबी राम जी भर देते हैं। याद तो होगा.... जितनी चाबी भरी राम ने, उतना ही चले खिलौना । बस जितनी हवा वह भर देता है, हम उतना ही उड़ पाते हैं और जैसे ही गुब्बारा फुस्स हुआ, धड़ाम से नीचे आ गिरते हैं।

मानुष की जात कितनी बेवकूफ और हठधर्मी है कि सब जानते बूझते भी स्वयं को स्वयंभू मानने लगती है। उसे बिलकुल याद नहीं रहता कि उसकी मर्जी के बिना तो पत्ता भी नहीं हिलता और वह ये माने बैठा है कि मैं ही सब कर रहा हूं। उसकी भृकुटि जरा टेढ़ी हो जाए तो भूचाल आ जाए, पृथ्वी डोलने लगे, सब उलट पलट हो जाए और तुम ये गुमान पाले बैठे हो कि जो हो रहा है, सब मैं ही तो कर रहा हूं। जो ये बात समझ आ जाए कि करने वाला तो कोई और है, हम तो उसके हाथों की कठपुतली मात्र हैं,वैसा ही नाचते हैं जैसा वह नचाता है। जनम हमार सफल वा आजु, प्रभू की कृपा भयहु सब काजू। प्रभु आपकी कृपा से सब काम हो रहा है, करते हो तुम प्रभुजी मेरा नाम हो रहा है। पतवार के बिना भी मेरी नाव चल रही है , हैरान हूं कन्हैया मंजिल भी मिल रही है। हां, प्रभू की कृपा हो तो मंजिल भी मिल जाती है। पर प्रभू कृपा करते हैं निर्मल ह्रदय वालों पर। निर्मल मन जन सोई मोहे भावा, मोहे कपट छल छिद्र न भावा। उसे ऐसे लोग बिल्कुल नहीं भाते जो मार कलुष से भरे हैं, जो कभी किसी का भला नहीं सोच पाते। चौबीस घण्टे ऐंठ में भरे रहते हैं। दूसरों को नीचा दिखाने का कोई मौका नहीं छोड़ते। वे केवल अपने सगे होते हैं और उनका अपनो का घेरा बहुत संकुचित होता है। उन्हें तो इतना भी भान नहीं कि ये मेरा है ये पराया है ,ऐसा तो छोटे चित्त वाले सोचते हैं। उदार चरित वालो के लिए तो पूरी दुनिया कुटुम्बवत होती है, सब अपने होते है।

जब जब जीवन में पटखनी मिले तो समझ लो ईश्वर हमें सचेत कर रहे हैं कि हे मन मूरख अब भी चेत जा, बहुत बावला हो लिया, अब तो भज प्रभू को। राम राम रट, हरे कृष्ण हरे कृष्ण का जाप कर, ईश्वर चिंतन में ध्यान लगा। जब चेतना वहां केंद्रित होगी तो बुरा करेगा ही नहीं, सब अपने से लगने लगेंगे। पाप कर्म में अरुचि होगी। सत्संग में मन लगेगा। और जो ऐसा हो जाए तो दुनिया कितनी मनभावन हो जाती है। दूसरों के दोष मत देख, दृष्टि स्वयं पर रख, स्वयं को सुधार। कबीर को याद रख बुरा जो देखन मैं चला बुरा न मिलिया कोय, जो दिल खोजा आपना मुझ सा बुरा न कोय। वो ऐसा है वो वैसा है बहुत कर लिया, अब अपने अंदर झांकने की बारी है कि मैं कैसा हूं, मेरा दूसरों के साथ व्यवहार कैसा है। जो दोगे वही पाओगे। बोया पेड़ बबूल का आम कहां से होय। सब अपना ही किया धरा है, उसी का फल भोग रहे हैं। भोगना तो होगा ही, उससे बचा नहीं जा सकता। बस जो प्रभू कृपा हो जाएं तो इसे सरलता से भोग लेंगे। कहते हैं प्रभु का निरंतर जाप आपको पाप और दुष्कर्म से दूर रखता है, आपके मन को निर्मल बनाता है, मन की कटुता और द्वेष को हर लेता है। फिर सीधा जपो या उल्टा, वाल्मीकि तो मरा मरा से ही तर गए। राम कहो कृष्ण कहो, किसी भी रुप को भजो, सब एक ही है। चाहे राम कहो या कृष्ण कहो दोनों का मतलब एक ही है।

और सहारे झूठे हैं बस एक सहारा सच्चा है। और वह सहारा ईश्वर का है। सब ओर से टूटकर हार कर व्यक्ति अंत में उसका शरणागत ही होता है। उसे सच्चे भाव से पुकारता है, उसकी पुकार जरुर सुनी जाती है। प्रभु आते हैं, उन्हें आना ही होता है, नंगे पैरों दौड़े आते हैं, भक्त की पुकार सुन रुक ही नहीं सकते। ध्रुव प्रहलाद जैसे भक्त के कठिन तप से उनका सिंहासन डोलने लगता है। वे तो भाव देखते हैं, वस्तु नहीं इसलिए तो दुर्योधन की मेवा छाड़ी साग विदुर घर खायो। झूठे सकरे का भेद मानते तो शबरी के झूठे बेर इतने प्रेम से कैसे खा लेते। प्रभू बहुत दयालु हैं। बस उन्हें ध्याना होता है, उनमें मन लगाना होता है। उसे साधने से सब सध जाता है। एकही साधे सब सधे सब साधे सब जाय, रहिमन सींचे मूल को फूलही फलहि अघाय। तो फुलक फुलक को मत सींचो, उससे कुछ नहीं होगा।

प्रभू दुख में रखो, सुख में रखो बस साथ बने रहो, सब निभ जाएगा, सब बंधन कट जायेंगे। इतनी कृपा बनाए रखना भगवन। इतना तो करना स्वामी जब प्राण तन से निकले, गोविंद नाम लेके मेरे प्राण तन से निकले। श्री जमुना जी का तट हो, मेरा सांवरा निकट हो, मेरे मुख में गंगाजल हो उसमें भी तुलसी दल हो, बस प्रभू आपकी बांसुरी की तान सुनाई दे और ये प्राण छूटे। हम तो पापी हैं, हमें ये सौभाग्य जाने

 कब मिलेगा। यमुना तट के वासी है और पूजाघर में गंगाजल रखते हैं पर जो तेरी कृपा न हो तो सब ऐसे ही धरा रह जाता है। तो प्रभू जी, दया करो कृपानिधान, तेरी शरण है। तेरे द्वार खड़ा भगवान भगत घर तेरे डोले, तेरा होगा बड़ा अहसान, कि तेरी जुग जुग रहेगी शान भगत घर तेरे डोले। प्रभू बहुत भटक लिए बस अब अपनी शरण में लो भगवन। सारे सहारे झूठे है बस तेरा सहारा सच्चा है।

इत्ते उलायती हू मत बनो

 सफर जारी है....1533 18.06.2024 इत्ते उलायती हू मत बनो.... बिन पे तो मैया की कोख में हू नौ माह नाय टिको गयो,दुनिया देखबे की उलायत लग रही.पडब...