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Monday, October 3, 2022

थे ताकत के पुतले बापू

 सफर जारी है.....1080

02.10.2022

थे ताकत के पुतले बापू......

कौन होते हैं वे लोग जो मर कर भी अमर हो जाते हैं, प्रशंसा या आलोचना के बहाने सब के दिलों में बने रहते हैं। जन्मते तो किसी एक परिवार में हैं पर चहेते लाखों करोड़ों परिवारों के हो जाते हैं। ऐसों के लिए रचनाकारों को लिखना पड़ता है चल पड़े जिधर दो डग मग में, चल पड़े कोटि पग उसी ओर। जिधर उनकी दृष्टि उठ जाती है, सब लोग वहीं देखनेलगते हैं। अपने कर्मों से वे बापू और महात्मा बन जाते हैं, देश में चरखा, तकली और स्वदेशी वस्तुओं के प्रचार में लग जाते हैं, वे व्यक्ति कब रह जाते हैं, वे तो मिथक बन जाते जाते हैं, पूज्य हो जाते हैं, गांधीगीरी से अभिहित किए जाते हैं। उनके चरित्र पर डोकूमेंट्री और फिल्में बनती हैं, मार्गों का नामकरण उनके नाम पर होता है,  वे अपने देश में ही नहीं, विश्व भर में अपना लोहा मनवा लेते हैं।

हमने भी बापू को कक्षा दो में पढ़ी कविता से ही जाना था। दुबले पतले,धोती लपेटे, एक हाथ में लाठी लिए और चश्मा लगाए व्यक्ति गांधी थे। हम सबके थे प्यारे बापू, सारे जग से न्यारे बापू। लगते तो थे दुबले पतले पर ताकत के पुतले बापू। सबको गले लगाते बापू, सच की राह दिखाते बापू, कभी न हिम्मत हारे बापू। फिर गांधी जी के तीन बंदरों के बारे में जाना जिनमें एक आंख, दूसरा कानऔर तीसरा मुंह बंद किए होता था कि बुरा मत देखो बुरा मत सुनो बुरा मत बोलो, बुरी है बुराई मेरे दोस्तो। पन्द्रह अगस्त और छब्बीस जनवरी को झंडा फहराने के बाद जब जोशीले नारे लगते तो महात्मा गांधी अमर रहें के नारे लगते। बहुत उत्सुकता होती थी उस महापुरुष के विषय में, फिर उनकी आत्म कथा से उद्धृत छोटे छोटे पाठ पढ़ते जाना कि वे सत्यवादी हरिश्चंद्र और मातृ पितृ भक्त श्रवण कुमार का नाटक बायसकोप में देखकर बहुत प्रभावित हुए और उन्होंने भी अपनी माता का मान सदैव बनाए रखा। उनका लेख खराब था इसलिए वह सबको सुन्दर लेख के लिए प्रेरित करते थे। कक्षा में निरीक्षण के लिए अधिकारी के आने पर उन्होंने मास्टर के कहने पर भी स्पेलिंग के गलत हिज्जे साथी की कापी से नहीं उतारे। वे सत्य के पालन में पूर्ण विश्वासी थे। वर्धा जाते उनका सेवाग्राम देखने और अहमदाबाद में बापू कुटीर और बा निवास देखते उनके जीवन के बहुत सारे पल सजीव हो उठते हैं। बापू मोहनदास कर्मचंद गांधी से बहुत ऊपर उठ एक किंवदंती बन चुके हैं। मुन्ना भाई एम बी बी एस और लगे रहो मुन्ना भाई में गांधीगीरी के सिद्धांत ही तो दिखाए गए हैं। वे साबरमती के संत कहे जाते हैं। सत्य, अहिंसा उनके मुख्य शस्त्र रहे हैं। नमक आंदोलन, पैदल यात्रा, सत्याग्रह के लिए वे जाने जाते हैं।

आज है दो अक्टूबर का दिन आज का दिन है बड़ा महान गीत ने ही जन जन को समझाया है कि यह तिथि अकेले बापू की ही जन्मतिथि नहीं, लाल बहादुर के जन्म का उत्सव भी है। आज के दिन दो फूल खिले थे जिनसे महका हिंदुस्तान, जय जवान जय किसान। एक का नाम था बापू गांधी और एक लाल जवाहर थे, एक का नारा अमन एक का , जय जवान जय किसान। नाटे कद के लेकिन संकल्प शक्ति के धनी पूर्व प्रधान मंत्री लाल बहादुर शास्त्री किसी से हेठे थोड़े ठहरते हैं। नैतिक मूल्यों पर पूरा जीवन न्यौछावर कर देने वाले शास्त्री जी हम सबके आदर्श हैं। उनको पढ़ते हमने जाना जो मन में ठान लो,दृढ़ संकल्प ले लो तो तुम भी हिमालय की ऊंचाइयां छू सकते हो, देश के शीर्षस्थ नेतृत्व पर पहुंच सकते हो। अमीर या गरीब परिवार में जन्म लेना तुम्हारे हाथ नहीं हुआ करता, पर अपने परिश्रम से, अपने संकल्प से,धैर्य से तुम अपनी ही नहीं, अपने देश की तकदीर भी बदल सकते हो। होते होंगे गांधी जी शास्त्री के जीवन के कुछ आलोचनात्मक पक्ष पर हमारे मस्तिष्क पर तो बालपन से ऐसी ही छाप पड़ी है , वही स्थाई है। दोनों ही हमारे लिए समान रूप से वंदनीय है, अभिनंदनीय है। जयंती पर उनके चरणों में सादर वंदन। कोशिश रहेगी कि हम भी उनके जीवन से प्रेरणा ले अपने जीवन को उस ऊंचाइयों तक ले जा सके जहां तक वे पहुंचे। सत्य अहिंसा के पक्षधर गांधी जी और जय जवान जय किसान के पोषक शास्त्री जी को सादर नमन।

इत्ते उलायती हू मत बनो

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