Showing posts with label हो गए पूरमपट्ट पिचहत्तर. Show all posts
Showing posts with label हो गए पूरमपट्ट पिचहत्तर. Show all posts

Wednesday, August 17, 2022

हो गए पूरमपट्ट पिचहत्तर

 सफर जारी है......1026

16.08.2022

हो गए पूरमपट्ट पिचहत्तर......

जी हां ,देश को आजाद हुए हो गए पिचहत्तर वर्ष तभी तो देश आजादी का अमृत महोत्सव मना रहा है। उन वीरों को नमन करने, उन्हें याद करने, उनसे प्रेरणा लेने का अवसर है जिन्होंने देश के लिए अपने प्राण न्यौछावर कर दिया। कलम आज उनकी जय बोल। कुछ सिपाही देश की सीमा पर लड़ रहे थे तो कुछ कलम के सिपाही ओज भरे गीत लिखकर देशवासियों में उत्साह का संचार कर रहे थे। सोए हुओं को जगा रहे थे। सबकी भूमिका तय थी। छोटे छोटे बालक नन्हा मुन्ना राही हूं देश का सिपाही हूं बोलो मेरे संग जयहिंद जयहिंद गा रहे थे। युवा आग अंतर में लिए पागल जवानी के प्रतीक थे। कितने कितने शीश कटे, कितनों ने बलिदान दिए, तब जाकर लम्बे समय बाद आजादी मिली। वंदे मातरम और भारतमाता के जयघोष से भारत गूंज उठा। हम आजाद हो गए, हमारी प्रसन्नता का पारावार न था। मार मगन हुए जा रहे थे। बाल कृष्ण शर्मा नवीन लिख रहे थे कोटि कोटि कंठों से निकली आज यही स्वर धारा है, भारतवर्ष हमारा है यह हिंदुस्तान हमारा है।

भारत कोई स्थान का टुकड़ा नहीं है, यह वह भाव है जिसके लिए लिखा गया भारत नहीं सस्थान का वाचक गुण विषेष नर का है, एक देश का नहीं शील यह भूमंडल भर का है, जहां कहीं एकता अखंडित जहां प्रेम का स्वर है, देश देश में वहीं खड़ा भारत जीवित भासवर है, निखिल विश्व की l भारत को नमन करूं मैं, तुझको या तेरे नदीश गिरिवर को नमन करूं मैं, किसको नमन करूं मैं भारत किसको नमन करूं मैं।मैथलीशरण गुप्त लिख रहे थे जिसको न निज गौरव तथा निज देश का अभिमान है , वह नर नहीं नर पशु निरा और मृतक के समान है। जननी और जन्मभूमि को स्वर्ग से भी बढ़कर दर्जा दिया गया। समझाया बताया गया कि जिस देश में तुमने जन्म लिया है, उसके प्रति तुम्हारे कुछ कर्तव्य हैं, इनका पालन करना तुम्हारा धर्म है। जिसकी रज में लोट लोट कर बढे हुए हैं, घुटनों के बल सरक सरक कर बड़े हुए हैं, उस भूमि के लिए अपने कर्तव्य तो याद रखें। ध्रुववासी जो हिम में तम में जी लेता नित हांफ हांफ कर, रखता है अनुराग अलौकिक वह भी अपनी मातृभूमि पर। देश के लिए जीओ देश के लिए मरो। गलत मत कदम उठाओ, सोच कर चलो, विचार कर चलो राह की मुसीबतों को पार कर चलो।

न जाने कितने कितने गीत हैं, कहानी हैं, किस्से हैं जिन्हें रेखांकित किया जाना जरुरी है, याद किया जाना जरुरी है। देश की आजादी पिचहत्रवा वर्ष मना रही है। पिचहत्तर वर्ष का इतिहास दोहराते यह भी याद रखना है कि हम बहुत सौभाग्यशाली हैं जिन्हें अमृत वर्ष उत्सव मनाने का सौभाग्य मिला। हमारी पीढ़ी को तो सब कुछ हस्तामलक हो गया, उसके लिए कुछ सहना और करना नहीं पड़ा, गुलआमी कका दर्द नहीं सहा हमने, नंगे वदन लाठियां नहीं झेली हमने, जेलों में हमें नहीं ठूंसा गया। हमें लगता है ये आजादी हमें घर बैठे मिल गई है तभी इसकी कदर नहीं जानते। धन्य है हमारे स्वतंत्रता सेनानी जिन्होंने सब सहा, उफ तक नहीं की, वंदे मातरम गाते भारत माता की जय बोलते फांसी के फंदे पर झूल गए। कर चले हम विदा जा वतन साथिया, अब तुम्हारे हवाले वतन साथियों।

जो वतन हमारे हवाले किया गया, उसके प्रति हमने क्या भूमिका निभाई। अरे हमें कौन सीमा पर लड़ने के लिए कहा जा रहा था। हमें तो बस अपने अपने हिस्से के कामों को लगन, धैर्य, निष्ठा से करना भर था, पर हम तो छल द्वंद में फंस कर रह गए, इसकी उसकी चुगली चकोरी आलोचना में लग गए, सरकारी संपत्ति को नुकसान पहुंचाते अपने को दादा मानने लगे। सच न बोलने की तो जैसे हमने कसम खा ली। दूसरे की बहिन बेटी का सम्मान करना तो दूर की बात रही, अपनी ही जन्मदात्री का मान नहीं रख पाए। एक बार सोचे विचारे अवश्य कि हम अपनी अपनी भूमिका में कहां तक सफल हुए हैं।

आजादी अमृत महोत्सव मनाते हम स्वयं को चुस्त दुरुस्त कर लें, अपने कर्तव्यों को सजगता से निभा ले जाएं, जो पढ़ें उसे आचरण में ढाल लें तो हमारा महोत्सव मनाना सार्थक हो सकेगा। जय भारत, जय भारती।

इत्ते उलायती हू मत बनो

 सफर जारी है....1533 18.06.2024 इत्ते उलायती हू मत बनो.... बिन पे तो मैया की कोख में हू नौ माह नाय टिको गयो,दुनिया देखबे की उलायत लग रही.पडब...