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Wednesday, August 17, 2022

बिसारिए न राम

 सफर जारी है....1008

27.07.2022

बिसारिए न राम .....

ये जो पल पल पर चिन्ता करने का स्वभाव बन गया है, जरा मनचीता नहीं हुआ कि लगता है आसमान गिर पड़ेगा, बादल फट जाएंगे, अब क्या होगा, कैसे करेंगे, क्या करेगे, कैसे होएगी टाइप प्रश्नों से घिर जाते हैं ये जानते बूझते भी कि चिंताएं परेशानी का समाधान नहीं हुआ करती बल्कि चिंता से समस्या  में सौ गुना इजाफा ही होता है, चिन्ता किए बिना नहीं रहा जाता। वैसे आदमी कुछ और करे न करे पर चिंता तो कर ही सकता है। अब चिंतन होता नहीं तो चिंता करके ही काम चला लेता है। स्वभाव से मजबूर जो है। समाधान खोजने की जगह चिन्ता करना शायद ज्यादा सरल लगता हो।

 चिन्ता को अंतिम विकल्प के रुप में चुनने वाले हम बरगे लोगों को हारिए न हिम्मत बिसारिए न राम बिलकुल भी याद नहीं रहता। दोनों में से एक भी याद रह आता तो या तो हिम्मती बनते, जैसा होता जितना होता, हाथ पैर चलाते, कम से कम ये संतोष तो रहता कि हमने अपना सा किया। और जो फिर भी सफलता नहीं मिली तो को अत्र दोष। दुबारा से फिर मेहनत करेंगे, बेहतर करेंगे और फल पाएंगे। हिम्मत हारने से हाथ पैर छोड़ने से भला क्या मिलता है। पर दुर्वल मानसिकता के लोग सरल रास्ता चुनते हैं, वे जल्दी हिम्मत हार जाते हैं, दो चार हलके फुलके प्रयास वे भी बेमन से किए, किसी दूसरे के कहने से कर भर दिए कि लो नहीं मान रहे हो, सारे दिन किच किच लगाए रहते हो तो तुम्हारी संतुष्टि के लिए ये भी किए देते हैं। तो जिस काम में आपका आत्म ही नहीं जुड़ा होता, जिसे अनिच्छा से किया जाता है, जिसे सामने वाले के संतोष के लिए किया जाता है उसमें भला सफलता मिलेगी भी कैसे। बात बात पर हिम्मत छोड़ बैठना, हिम्मत हार जाना, मुझसे नहीं होगा, मैं इसे कर ही नहीं सकता जैसे वाक्य बोलने दोहराने की आदत हो जाए तो काम कैसे चलेगा। हारिए न हिम्मत ज़िंदगी को जिंदाजिली से जीने का पहला सूत्र है। मन को मजबूत बनाए रखिए। ये बात बात पर घबराना, चिन्ता करना, हाथ पर हाथ धरे बैठा रहना , केवल झींखना, रोना कलपना, बेबात की चिंता करना, छोटी सी बात को भी ताड़ बनाकर कहना, हमेशा शिकायती स्वर रखना आगे बढ़ने की निशानी नहीं है। ये तो आपके कदमों में वैसे ही जंजीर डाल देगी। तो हिम्मत मत हारो, साहसी बनो और जो जितना कार्य क्षमता में हो, किए जाओ।

 दूसरे राम को मत बिसारो। एक तो हिम्मत से काम नहीं लेते, पहले से ही मुझसे नहीं होगा का राग अलापना शुरू कर देते हैं और फिर रही सही कसर मार नास्तिक बने बैठे रहते हो। अरे राम को भजो तो सही, उन्हें सच्चे मन से ध्याओ तो सही, भजो तो सही,उनका नाम लो तो सही। ये क्या हर बात में खुद को ही कर्ता क्यों मान बैठते हो। तुम अपने हिस्से का करो और राम जी पे छोड़ दो, देखो राम करते हैं या नहीं। दाता एक राम भिखारी सारी दुनिया, राम एक देवता दुखियारी सारी दुनिया। राम भजो राम भजो राम भजो बाबरे। उसके बिना सद्गति है भी नहीं। भगवत भजन में कोई दाम नहीं लगता, बस अपना काम किए जाओ और राधे राधे जपो जाओ। उसे ही मत बिसारो। वही आपकी शक्ति है। उसी पर भरोसा रखो। इतनो इतनो के बिगड़े काम बनाए तो हमसे कोई दुश्मनी थोड़े ही है कि हमारी ही सुध नहीं लेगा। रोज जपो, बिना स्वार्थ के भी जपो, बस उसके नाम में लौ लगाए रखो। रटते रहो राम राम कहते रहो, कभी तो कान देंगे, वे गरीब नेवाज कहे जाते हैं, सबकी नैया पार लगाते हैं तो हमें ही क्यों छेकेंगे। सो उनके आगे ही हाथ पसारते हैं, उनसे ही कहते सुनते हैं प्रभो, लाज रखो हमारी, तुम्हारी शरण में है भगवन, जो उचित लगे करो, क्या मांगे भगवन, हम तो अनाड़ी है नहीं जानते जो मांग रहे हैं वह हमारे अनुकूल होगा भी या नहीं तो प्रभु जीवन डोर तुम्हें ही सौंप देते है, जैसे रखोगे रह लेंगे प्रभु। रक्षा करो प्रभु, त्राहि माम त्राहि माम।

तो गांठ बांध लेते हैं.... हारिए न हिम्मत बिसारिए न राम।

इत्ते उलायती हू मत बनो

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