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Tuesday, July 19, 2022

ठोकरें भी सिखाती हैं........

 सफर जारी है...922

30.04.2022

जीवन का हर अनुभव आपको समृद्ध बनाता हैं खासतौर पर जब आपको ठोकर लगती है, आप गिरते हैं, चोटिल होते हैं और माता पिता गुरु की सीख को याद करते हुए धूल झाड़ कर उठ खड़े होते हैं।बचपन में गिर जाने पर फिसल जाने पर बड़ों dvaaraa कह दिया जाता चींटी मर गई यानी गिरने से तुम्हारा नहीं अगले का ही नुकसान हुआ है, गिर गिर कर ही खड़े होना सीखते हैं और हम बच्चे कपड़ों की धूल झाड़ उठ कर खड़े हो जाते और आगे बढ़ जाते।गिरने पर रोते तभी तक थे जब तक कोई उठाने वाला और पीठ सहलाने वाला सामने हो कि कोई बात नहीं, ऐसे तो गिरते ही रहते हैं।चलो उठो धूल झाड़ो आगे बढ़ जाओ।संभल कर चलना सीखो।फिर बड़े होते ये आदत में शुमार हो गया कि जीवन में इन घटनाओं से सबक लेते आगे बढ़ जाओ, वहीं चिपके मत रह जाओ।ये ठोकरें आपको सिखाने के लिए, नए पाठ पढ़ाने को ही आती हैं।तब से गिरते पड़ते नये नये चरित्रों से टकराते रोज सीख ही तो रहे हैं।इतनी जिंदगी बीत गई पर अभी तक आधे सबक भी याद नहीं हो पाए।जब तक पुराने सबको को दुहरा दुहरा कर पक्का करें तब तक एक नये सबक से साबका पड़ जाता है।

          हर तीसरा सामने वाले को बेबकूफ और खुद को बेहद अक्लमंद और तुम्मन खां समझे बैठा है।ऐसे ऐसे व्यक्तित्वों से दुनिया भरी पड़ी है कि बस पूछो ही मत।अब दो दिन पहले की ही बात ले लो कि ऐसे अड़ियल टट्टू से पाला पड़ गया कि कुछ पूछो ही मत।बात पूरी बता के दे नहीं और पूछने पर हर बार इधर से उधर सरका दें,कि आज कल में हो जाएगा, बस मैम आप बिलकुल चिंता मत कीजिये।हम हैं न, सब कर लेंगे ।बस आप निश्चिन्त रहें।पर जिसके पास दायित्व हो वह भला निश्चिन्त बैठ कैसे सकता है।तो जब बादल बिल्कुल ही सिर पर घिर आये तो घबराहट और बैचेनी बढ़ने लगी कि अब तो मूसलाधार के आसार हैं पर न कहीं छये की व्यवस्था है और न ही छाता रेनकोट दिख रहे हैं।और अगले ने सम्पर्क के सारे साधन बन्द कर रखे हैं।चौबीस घण्टे पहले तो अलर्ट हो ही जाना चाहिए और यहां तो सोता पड़े हुए हैं, सब सूमसाम से।लग ही नहीं रहा कि कुछ बड़ा आयोजन होने को है।खैर चुप्पी इसलिए साध ली कि कभी कभी अगला बड़े बड़े सरप्राइज चुपके से देता है और आपको अचंभित कर देता है।आप सोचते ही रह जाते हो कि अरे हमने तो सोची जे कछू नाय करेगो पर जाने तो सब चमाचम कर दयो।काहू ए सल हू नाय परी और सब रज की तज कर दयो।सोचे तो यही बैठे थे पर सारे अरमानों पर पानी फिर गया जब मिस्टर सो एन्ड सो अंतिम क्षण पर व्यस्तताओं का रोना रोते प्रकट हुए और जब व्यवस्थाओं का जायजा लिया तो पता चला कि सरप्राइज तो था ,कार्यक्रम वैश्विक के स्थान पर वन मैन शो में बदल दिया गया था।पर्चे में जिन्हें होना चाहिए था वे सिरे से गायब थे और अपनों को रेवड़ियों का बांट बखरा कर दिया गया था।अच्छा तो अब समझ आया कि इतनी टालमटोल इसलिए की जा रही थी और हम थे कि आंखें मूंदे विश्वास किये बैठे थे कि अगला कह रहा है तो सब हो ही गया होगा, सब कर लिया होगा।खैर आनन फानन में युद्ध स्तर से सब व्यवस्थित किया गया ।

          तो एक सबक और मिला कि अपना काम और साझे के काम में अंतर होता है।किसी के भरोसे आंख मूंद कर काम छोड़ कर नहीं बैठा जा सकता।संयुक्त साझेदारी में आपकी भूमिका और महत्वपूर्ण हो जाती है, आपको हर समय सावधान होना होता है।हर घड़ी सीसीटीवी कैमरे की तरह चुस्त और सावधान होना होता है।सारी गतिविधियों पर आई वाच रखनी होती है।अगले को बार बार झकझोरना होता है और इतने पर भी अगला मक्कड़ किये बैठा रहे, इधर से उधर करता रहे तो भविष्य के लिए साझे के काम में हाथ डालने से बचना चाहिए। ये जिंदगी रोज नया पाठ पढ़ाती है, रोज लगती ठोकर चेताती है कि बहुत आंख खोलकर,सर्पिल घुमावदार रास्तों की जटिलता समझ कर चलना आपके हित में है।तो ठोकरों से सबक लेना जरूरी है दोस्तो ।

इत्ते उलायती हू मत बनो

 सफर जारी है....1533 18.06.2024 इत्ते उलायती हू मत बनो.... बिन पे तो मैया की कोख में हू नौ माह नाय टिको गयो,दुनिया देखबे की उलायत लग रही.पडब...