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Thursday, May 19, 2022

लघु न दीजिये डारि

 फर जारी है......871

10.03.2022

लघु न दीजिये डारि.......

लघुता में भी व्यापकता छिपी है।एक छोटा सा दीपक घने अंधकार को अपनी ज्योति से चीर देता है।तभी महादेवी कहती हैं मधुर मधुर मेरे दीपक जल प्रतिक्षण प्रतिपल जीवन का पथ आलोकित कर, अज्ञेय भी यह डीप अकेला मदमाता इसको भी पंक्ति दे दो लिखते हैं।बिहारी के दोहे तो देखने में भले छोटे हों पर घाव बड़े गम्भीर करते हैं सतसैया के दोहरे ज्यों नाविक के तीर, देखन में छोटे लगे घाव करे गम्भीर।छोटी मिर्च बड़ी तेज बलमालोक में खूब प्रचलित है ही।रहीम तो दोहे दर दोहे रचते ही हैं रहिमन देख बड़ेन को लघु न दीजिये डारि, जहां काम आवे सुईं कहा करे तलवारि।सच ही तो बै छोटी सी बित्ते भर की सुई फ़टे हुए कपड़ो को सी देती है, सारे छिद्रों को रफू कर देती है, सुई का काम जोड़ने का है इसलिए दर्जी भी उसे टोपी में लगाता है, उसमें लम्बा धागा डाल के रखता हैं कहीं वह निगाह से बिलट न जाये।उसी छोटी सी नुकीली पैनी सुई से पैर में गड़ा कांटानिकाल लिया जाता है, कोई बड़े अस्त्र शस्त्र के साथ लड़ने आये पर आप छोटी सी सुई चुभोकर उसके सारे वार खाली कर देते हैं।अब सुई इतनी महत्वपूर्ण है तभी सबको जोड़ कर रख पाती है।कैंची का तो काम ही काटना है वह तो अच्छे भले नए कपड़े को भी अनेक टुकड़ो में बांट देती है वह तो सुई का ही बूता है कि सारे टुकड़ों को करीने से जोड़ कर बिल्कुल नाप की सुंदर पोशाक में बदल देती है।कैंची का काम कतरना है इसलिए दर्जी उसे पैरों के पास ही रखता है।अब चाहे जुबान हो जो कैंची सी कतर कतर चलती है और सबका बुरा बना देती है या फिर कैंची हो काम तो दोनों का एक ही है।

छोटी सी चींटी विशालकाय हाथी की सूंड में घुस जाए तो उसकी नाक में दम कर देती है, बेचारा घण्टों परेशान रहता है याद आ गई होगी दर्जी हाथी की कहानी कि कैसे दर्जी के लड़के के द्वारा फल न दिया जाकर उसकी सूंड में सुई चुभो देता है और हाथी तालाब का गंदा पानी सूंड में भरकर उसकी दुकान में डाल देता है।बस जैसा करो वैसा भुगतो।

किHछोटी सी चीटी पानी में पत्ता डाल कर फाखते को बाहर आने में भी सहायता करती है।शिकारी के पैर में काटकर उसका ध्यान बंटा देती है और पक्षी की जान बच जाती है।छोटी है तो क्या हुआ बड़े बड़े जो कर नहीं पाते उसे चुटकी बजाते कर देती है।चना न चब्बू कहानी में चिड़िया का दाना चिरी हुई लकड़ी के बीच फंस जाता है उसकी मदद चूहा बिल्ली राजा रानी बढ़ ई कोई नहीं करता, सब उसे टरका देते हैं लेकिन छोटी सी बेमालूम सी चींटी हाथी की सूंड में घुसकर उसे परेशान कर देती है और हाथी परेशान होकर वही करता है जैसा चीटी चाहती है।अंत में बढई लकड़ी चीर ढ़ेता है और नन्ही प्यारी चिड़िया को उसका दाना मिल जाता है वह दौल का दाना खुशी से चाब लेती है।

एक और कहानी याद आती है जिसमे सोते सिंह राजा को छोटा चूहा उस्ककी नाक पर चढ़ कर परेशान करता है, शेर को गुस्सा आता है वह चूहे लो अपने पंजे में दबा कर खतम करना ही चाहता है पर चूहा निवेदन कर लेता है मुझे आप छोड़ दें, कभी मैं भी आपके काम आ स्कता हूँ।शेर को हंसी आ जाती  है भला ये मरगिल्ला सा चूहा मेरी क्या सहायता करेगामममममKपर दयावश उसे छोड़ देता है।भाग्य का खेल देखिए कि वही छोटा चूहा शेर के जाल में फंसने पर अपने दोस्तों को साथ लेकर जाल काट देता है।वह तो इतना बहादुर है कि चित्रग्रीव कबूतरों की सहायता भी व्याध बहेलिया के जाल को काटकर करता है।

सच तो यह आकार प्रकार में छोटे होने से कुछ नहीं होता,सारा खेल बुद्धि का है।जहां छोटी सी सुई से काम चल जाए वहां भला तलवार का क्या काम।युद्ध हमेशा तलवारों से ही नहीं लड़े जाते,  समझदारी से भी बात बन जाती है।बात कहने का सलीका हो तो मधुर वचन से भी काम चल जाता है।सो आकार की लघुता पर ध्यान मत दो।बस ये देखो यदि अगला बुद्धि से छोटा है तो जरूर सावधान रहें।ये अक्कल से पैदल लोग खुद तो अपना कबाड़ा करते ही हैं साथ वाले को भी ले डूबते हैं।तो ऐसे लघु सोच वालों से दूरी बरतने में ही भलाई है।

इत्ते उलायती हू मत बनो

 सफर जारी है....1533 18.06.2024 इत्ते उलायती हू मत बनो.... बिन पे तो मैया की कोख में हू नौ माह नाय टिको गयो,दुनिया देखबे की उलायत लग रही.पडब...