Showing posts with label है हार जीत तुम्हारे हाथों में. Show all posts
Showing posts with label है हार जीत तुम्हारे हाथों में. Show all posts

Thursday, May 19, 2022

है हार जीत तुम्हारे हाथों में

 सफर जारी है...875

14.03..2022

भक्त की महिमा न्यारी है।वह अपने ऊपर कुछ भी नहीं लेता, बस उसे भक्ति करनी आती है, प्रभु को भजना आता है।सब ईश्वर का कार्य मानकर करता है फिर परिणाम चाहे कुछ भी हो सब उसकी मर्जी मान लेता है।जीत गए तो भी भले और न जीते,हार गए तब भी कोई बात नहीं।जैसी प्रभु की मर्जी।सब उसे सौंप निश्चिन्त हो जाता है।अब सौंप दिया इस जीवन का सब भार तुम्हारे हाथों में, है जीत तुम्हारे हाथों में है हार तुम्हारे हाथों में।बस दिन रात एक ही निश्चय दोहराता है  मेरा निश्चय बस एक यही एक बार तुम्हें पा जाऊ मैं, अर्पित कर दूं इस जीवन का सब प्यार तुम्हारे चरणों में।अपने पास कुछ भी रखने की इच्छा शेष नहीं।जो जग में रहूं तो ऐसे रहूं ज्यों जल में कमल का फूल रहे,मेरे सब गुण दोष समर्पित हों करतार तुम्हारे हाथों में।जल में कमल वत रहना इतना आसान कहाँ होता है ये तो कमल ही है जो कीचड़ में भी खिला खिला रहता है, कमल नाल भले पानी में डूबी रहे पर पत्तों पर पानी का कोई प्रभाव नहीं, सब बूंदें फिसल जाती हैं।फूल भगवान को चढ़ जाता है,बीज से मखाने बन जाते हैं और नाल कमल ककड़ी सब्जी के काम आ जाती है।अपने पास कुछ नहीं रखता, तेरा तुझको अर्पण के भाव से सब सन्सार को सौंप देता है।उसकी एक मात्र इच्छा है यदि मानुष योनि में जन्म मिले तो बस तेरे चरणों में लगन लगी रहे।यदि मानुष का मुझे जन्म मिले तो तेरे चरणों का पुजारी बनूं, इस पूजा की एक एक रग का हो तार तुम्हारे हाथों में।रसखान भी तो यही मांगते हैं... मानुष हों तो वही रसखान बसों ब्रज गोकुल गांव के गवारिन, जो पशु हो तो कहा बस मेरो चरों नित नन्द की धेनु मँझारन, जो खग हों तो बसेरों करो मिलि कालिंदी कूल कदम्ब की डारन, और पाहन हो तो वही गिरि को जो क्यो छत्र पुरन्दर धारण।नहीं पता कि किस योनि में जन्म मिलेगा बस भक्त तो एक ही बातजानता है पशु पक्षी पत्थर मानव मर्जी जिस योनि में भी जन्म दो रखना आप के चरणों में ही प्रभु, उनसे विलग मत कर देना प्रभु, बस इतनी कृपा बनी रहे।जब इस संसार में आ ही गया, इसकी माया में बन्ध गया फंस गया फिर भी प्रभु एक ही विनती है जब जब संसार का कैदी बनूं, निष्काम भाव से करम करूं,फिर अंत समय में प्राण तजूं निराकार तुम्हारे हाथों में।अंत भी हो तेरी गोद में हो, आंखों में बस तेरी छबि बसी रहे।इतना तो करना स्वामी जब प्राण तन से निकले ,गोविंद नाम लेके प्राण तन से निकले ।वंशीवट हो श्री यमुना जी का तट हो,मेरा सांवरा निकट हो जब प्राण तन से निकले।मेरे मुख में गंगा जल हो और उसमें तुलसी दल हो, मुख में राम का नाम हो जब प्राण तन से निकले ।मरते मरते भी तेरी छबि आंखों में बसी रहे,बस और कोई इच्छा नहीं है प्रभु।कितनी श्रद्धा कितना विश्वास है भक्त को प्रभु आते जरूर हैं बस दिल की गहराइयों से अन्तस् से सच्चे भाव से उन्हें पुकारना होता है।भगवान और भक्त में बस एक ही भेद है।मुझमें तुझमें बस भेद यही मैं नर हूँ तुम नारायण हो, में मैँ हूँ संसार के हाथों में  संसार तुम्हारे हाथों में।तुम चालक हो हम तो सवारी हैं।बस नाव में बैठ गए, पतवार तो आप ही खेओगे।

बड़ा भरोसा है खेवनहार पर तभी मस्त होकर गाता है भक्त, मेरा आपकी कृपा से सब काम हो रहा है, करते हो तुम कन्हैया मेरा नाम हो रहा है।सब वही तो करता है, हम तो निमित्त भर हैं फिर भी सारा क्रेडिट अपने ऊपर लेते फूले नहीं समाते कि मैंने किया।पतवार के बिना ही मेरी नाव चल रही है,हैरान है जमाना मंजिल भी मिल रही है,करता नहीं मैं कुछ भी सब काम हो रहा है।सच जब प्रभु पर अगाध विश्वास हो तो काम सिद्ध हो ही जाते हैं।तुम साथ हो तो मेरे किस चीज की कमी है,किसी और चीज की अब दरकार ही नहीं है।बस एक तुझे पा लिया तो और क्या पाना शेष रह गया भला।मैं तो नहीं हूँ काबिल तेरा प्यार कैसे पाऊं,टूटी हुई वाणी से गुणगान कैसे गाऊं, सब तेरी प्रेरणा से ये कमाल हो रहा है।मुझे हर कदम कदम पर तूने दिया सहारा,

मेरी जिंदगी बदल दी तूने कर के एक इशारा,एहसान पे ये तेरा एहसान हो रहा है।प्रभु मैं तो बहुत भटक जाता हूँ पर आप हर बार संभाल लेते हो।तूफान आंधियों में तूने ही मुझको थामा, तुम कृष्ण बन कर आये मैं जब बना सुदामा,तेरे करम से अब ये सरेआम हो रहा है।करते हो तुम प्रभु जी मेरा नाम हो रहा है।प्रभु आपकी कृपा से सब काम हो रहा है।मेरा काम हो रहा है।

भाव तो जागे कि करने वाला कोई और है हम उसके हाथों की कठपुतली हैं, जैसा नचाता है नाचते हैं।सो अपने सब गुण दोष उसे समर्पित कर देने में ही भलाई है।सूरदास की तरह प्रभु जी मेरे औगुन चित न धरो, समदर्शी प्रभु नाम तिहारो चाहो तो पार करो।एक बार विनत होकर देखो तो सही, उसकी शरण गहो तो सही, उसका भजन करो तो सही, न जाने डमडम डीगा डीगा जैसा क्या क्या गाते हो, क्लब में उल्टे सीधे गानों पर थिरकते हो कभी भगवान का नाम भी ले लिया करो, दो चार भजन गुनगुना लिया करो, ठुमक लिया करो, छोटी छोटी गैया छोटे छोटे ग्वाल छोटो सो मेरो मदन गुपाल पर ठुमक लिया करो।देखना कैसा आनंद आएगा, मन खुश हो जाएगा।ये सब भले ही आधुनिकता की श्रेणी में न आता हो और मन को बहुत सुकून मिलता है।प्रभु भी हम तो चाकर तेरे।

इत्ते उलायती हू मत बनो

 सफर जारी है....1533 18.06.2024 इत्ते उलायती हू मत बनो.... बिन पे तो मैया की कोख में हू नौ माह नाय टिको गयो,दुनिया देखबे की उलायत लग रही.पडब...