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Tuesday, July 19, 2022

लागी छूटे न

 सफर जारी है....947

28.05.2022

लगन तो लगन है, जिस किसी से और जिस किसी में भी लग जाए बस एक बार तो फिर नहीं छूटती।ये लगन जो ईश्वर से लग जाए तो भवसागर ही पार करा देती है।दिन रात भजन के बोल दिमाग में गूंजते रहते हैं लगन तुमसे लगा बैठे जो होगा देखा जाएगा, तुम्हें अपना बना बैठे जो होगा देखा जाएगा।और जो सांसारिकता में लग जाए तो लागी छूटती नहीं है।फिर तो गदही में भी परी के दर्शन होते हैं।ऐसे थोड़े ही कहन बनी होगी दिल लगा गधी से तो परी क्या चीज है।बस ये जी का लगना ही तो जी का जंजाल है।जी ही तो नहीं लगता पढाई लिखाई में।और कहीं प्यार व्यार के चक्कर में पड़ जाए तो बस सब वारे न्यारे करा देता है।ये जी ही दिल, जिगर ,मन ,मनुआ कहा जाता है।कभी कभी ये खो जाता है तो कभी आपके बस में नहीं रहता।और आप उसे खोजते पगलाते से इधर से उधर घूमते हो 'जाने कहाँ मेरा जिगर गया जी, अभी अभी यहीं था किधर गया जी'।

        देखने में कैसा छोटा सा लगता है जी, और बड़े बड़ों की नींद हराम कर देता है।क्या करे जी ही तो नहीं लगता नहीं तो आदमी हम भी काम के होते आज।इस जी ने तो ऐसी की तैसी कर के रख दी।क्या क्या तायने सुनबा देता है, भरे बाजार इज्जत उछाल देता है।जिंदगी भर तो मास्टरनी की डांट खाते रहे कि एक ये हैं महारानी इनका पड़ने में दीदा ही नहीं लगता, बस खेल खूब खिलबा लो।इधर उधर की बातें बनबा लो पर पढ़ने की मत कहो।इधर मास्टरनी टिर्राती और घर आओ तो मैया बापू हाय तौबा मचाते रहते अरे क्या होगा इस लड़की का, लंबी ऊंची तो खूब हो गई पर घर के कामकाज में  बिल्कुल जी नहीं लगता इसका, जब देखो दौड़ी छूटी बस्ता इधर उधर फैंक सहेलियों से बतराने निकल जायेगी।अब क्या करें दोस्तों से बात करने में बड़ा दिल लगता।और इसके बड़े ठोस कारण थे कि सहेलियों के   पास दुनिया जहान की बातें थी, सूरज की चन्दा की हवा की धूप की, इस मोहल्ले की उस मोहल्ले की, इस की उसकी सबकी।अब बातों में जी लगता था तो लगता था क्या करें।एक बार को खाना न मिले तो चलेगा ,बातों से पेट भर लेंगे पर अकेले बिल्कुल सूमसाम बैठना तब न पसन्द था न अब है । जी जिसमें लग जाता है, उसकी जी हजूरी करते पेट नहीं भरता।और जिससे उखड़ जाए उसकी सूरत भी नहीं देखना चाहता।बस कुछ दिल में बस जाते हैं और कुछ से दूरी बढ़ जाती है।

        लगन लगी मीरा को, राधा को, गोपियों को, शबरी को, विदुर को, गज को बस सबका कल्याण हो गया, दुनिया ही बदल गई, नाम अमर हो गया, साहित्य में दर्ज हो गई।'ऐसी लागी लगन मीरा हो गई मगन वह तो गली गली हरि गुण गाने लगी, महलों में पली बन के जोगन चली मीरा रानी दीवानी कहाने लगी'।राधे तो कृष्ण की ऐसी आराध्या शक्ति बनी कि कृष्ण मय हो गई।गोपियों को तो कुछ होश ही नहीं रहा, सब बाबली सी पूछने लगी मोकू लिखो है का मोकू लिखो है का।हनुमान को लगन लगी तो वे राम भक्त बन गए, ध्रुव को लगी तो पांच वर्ष की आयु में ईश्वर को पाने चल दिये, प्रह्लाद को हरि नाम का ऐसा चस्का लग गया कि वे अन्य साथियों को भी हरि कथा सुनाने लगे, वाल्मीकि को लगन लगी तो मरा मरा कह कर ही तर गए,वज्र बुद्धि के कालीदास महाकवि बन गए, तुलसी को पत्नी रत्नाबली की बात 'अस्थि चरम मय देह में तामे ऐसी प्रीत जो होती भगवान में तर जाती भवभीत 'इतनी अधिक लग गई कि रामचरितमानस ही रच गई।सिद्धार्थ को लगी तो बुद्धत्व प्राप्त हो गया।तो जीवन में कुछ लगना जरूरी है, सपनों का जगना जरूरी है, उत्कट लालसा जरूरी है।बस एक बार जो लगन लग जाये तो सब सध जाता है फिर साधन हो न हो, कोई फर्क नहीं पड़ता।बस व्यक्ति लक्ष्य तक पहुंच ही जाता है।

        कुछ को प्यार बांधता है तो कुछ को किसी का व्यवहार ही इतना अखर जाता है कि व्यक्ति खट्टा खा जाता है।मन फिर गया तो फिर गया, फिर उसकी ओर रुख तक नहीं करता।और कहीं दिल लग गया तो इतना सेंटी हो जाता है कि गाता डोलता है 'जिस गली में तेरा घर न हो बालमा उस गली से हमें तो गुजरना नहीं, जो डगर तेरे द्वारे पे जाती न हो उस डगर से हमें तो गुजरना नहीं'।जो जी लग गया तो ऐसा लग जाता है कि पूरी दुनिया छोड़ बैठते है और मन उचट गया तो बाबाजी बन बैठते हैं।दुनिया छोड़ने की बात करने लगते हैं।कैसा होता है ये लगना एक पल में जिंदगी बदल देता है।बस चाह जग गई तो जग गई, लगन लग गई तो लग गई फिर तो लागी छूटे न का रिकार्ड बजता रहता है।'एक तू जो मिला सारी दुनिया मिली'का राग अलापना शुरू हो जाता है और जो कहीं जी उचट गया तो पानी पी पी के उसकी सात पुश्तों को कोसते हैं।कभी जिसके साथ जीने मरने की कसमें खाई थी ,उससे लगन छूटी टूटी तो उसी के मरने के सपने संजोते हैं, उसके दुनिया छोड़ने पर घी के दीये जलाते हैं।कैसा होता है ये लगना जो पल में तोला पल में माशा कर देता है, अपनों को पराया बना देता है।कल तक जिस एक के लिए दुनिया छोड़ी थी ,आज उसी को दुनिया से रुसख्त करने के ख्वाब बुनने लगता  है और आगे ऐसे बढ़ जाता है जैसे बटोही।

        तो बस ये लगन लगी रहे,लागी छूटे न।

इत्ते उलायती हू मत बनो

 सफर जारी है....1533 18.06.2024 इत्ते उलायती हू मत बनो.... बिन पे तो मैया की कोख में हू नौ माह नाय टिको गयो,दुनिया देखबे की उलायत लग रही.पडब...