Friday, September 9, 2022

कहन, लोकोक्ति, मुहावरे के ब्याज से......

 सफर जारी है ........1051

10.09.2022

कहन, लोकोक्ति, मुहावरे के ब्याज से......

घर घर चूल्हे माटी के हैं बहना , मैंने बातऊ पूरी नाय करी तब तक तो चमेली बोल उठी ..ए रहन दे, अब कोई के घर में माटी के चूल्हा ना होवे, अब तो सिगरे गैस के चूल्हा पे बनाबे और कोई कोई तो बाए का कहबे इंडक्शन पे बना लेत है। अब कोई के घर माटी न बची के चूल्हा बनाबे कि बालक मिट्टी खाबे। बे जमाने और हते जब बालकन की तो छोड़ो,कन्हैया हू खूब माटी खायो करते। बो कैत नाए का तेरे लाला ने माटी खाई, जशोदा सुन माई। बाकायदा बिनको मंदिर है, बामे परसाद में माटी के लडडू ही मिलो करें। पहले की बात और हती सबके घर कच्चे होते, गोबर माटी से लीपे जाते, चूल्हा अंगीठी ऊ लीपे जातो पोता ते। काऊ के नेक चोट लग जाए, खून बून निकल आबे , नकसीर फूट जाबे तो झट्ट सीना पीली माटी लगा दई, सुंघा दई। बात बात पे कोई दागधर के झोरे थोड़े ही भागो करते । बैयर बानी सब जानती कि छोटो बालक रो रयो है तो बाए घुट्टी पिला दई के टूंडी पे हींग को फोआ धर दयो के हींग मल दई के गोद में लले के डकार दिला दई। बड़े कू हींग अजवायन की फंकी दे दई। और तो और काऊ बालक की बात करते करते जीभ कट जाबे तो मोंह में चीनी भर देते। मतबल जे कि इन छोटी छोटी बातन को इलाज घर में ही हतो। तबही जे कहन बनी होएगी के रसोईघर में ही बहुतेरे रोगन को इलाज है। सारे रोगन की जड़ जे पेट है। पेट ठीक रहे तो जे समझो कि तिहाई आधी बीमारी दूर है गई। पर अब कोई न समझे इन बातन ने, दौड़े छूटे सब डागदर के ही भागो करें।

देखो हम का कह रए ओर बाहेली ने अर्थ को अनर्थ कर दयो बात को। पूरी बात तो सुनी नाय और माटी और चूल्हा पे हमें ई लंबो चौडो भाषण पिला दयो, पूरी बात सुने बिना ई लठ्ठ ले के पिल पड़ी। ऐसेई बा दिन करी। हमने कही सोबरन को तो वो ई डोर है कि ऊंची दुकान फीको पकवान। सुनत खेम ही शुरू है गई, बाकी रेलगाड़ी ती सौ की स्पीड पे दौड़बे लगे बिना रुके, जे दारी की एक बार शुरू हे जाबे तो अपनी पूरी बात कह के ही रुके, बीच में कोई कोमा अल्प विराम न , सीधो पूर्ण विराम ही लगो करे। अब कहन लागी ए जीजी बिना मीठे के ऊ कहीं पकवान होय करें। आजकल जे नए चोचले चले हैं कि फीकी मिठाई खाई जाएगी के कम चीनी की की फीकी चाय पी जाएगी के हमें शुगर हे गई है। शुगर हे गई है शुगर हे गई है, हाथ पैर नाय हिलाओगे, दिन भर गोबर के चोथ से एक जगह ही जमे बैठे रहोगे, बस सारे दिना मुंह चलाते रहोगे, पेट में अंट संट ठूंसते रहोगे तो शुगर नाय तो का नमक होयगो। अरे खूब काम धाम करो, टैम ते खाओ भरपेट, खूब घी खाओ, गुड खाओ देखो ठीक रहत हो कि नाय। दिन भर तो सफेद, लाल, पीली गोली कैप्सूल ठूंसते रैत हो, एसिडिटी के मारे कलेजा जलत रैत है सो अलग, हाय हाय चिल्लात हो। अरे जे ख़ाली पेट चाय काफी सुडकबो ठीक नाय। ढंग ते चबा चबा के दाल सब्जी चावल रोटी खाओ दो टैम और खूब स्वस्थ रहो। इतनी तो बीमारी पाल रखी हैं कि दवाई ते छुट्टी मिले तो खाने कू सोचे। और फिर जे कहावत कैत डोल तो कि ऊंची दुकान फीके पकवान। पकवान तो मीठे ही होय करें भैया।

           देखी इन गैर पढ़ी लिखीन की बात, कैसे बात को बतंगड़ बना दयो। इन जैसेन ते तो बात करबो ही फिजूल है। कोई कहावत, लोकोक्ति, मुहावरे की बात सुनाओ तो ऐसे खींच के रख देत है कि कछू पूछो ई मत, सब अक्ल घास चरने चली जाए। घर घर चूल्हे माटी के ही होय करें बहना जाको मतबल होत है कि सबके घरन में थोड़ी ऊंच नीच तो लगी ही रहत है। हम्माम में सब नंगे ही है, जा घर की मत उघाड़ो बोई अच्छो है। जो तुम्हें दूर ते बड़े सुखी लग रए हैं, दिन भर ठहाके से लगात रैत हैं, बिनकी हंसी के पीछे आंसू रैत है, वे सब बातन कू भुला के अपने कू सुखी दिखाबे की कोशिश में लगे हैं। तो तुमऊ खुश रहबो सीखो, दूसरे के कहबे की ज़्यादा परवाह मत करों। बिनको तो काम ही हे कहबो। वे जई के काजे बने हैं और हम सुनबे को।

           ऊंची दुकान फीके पकवान को अर्थ होय करे कि बात तो बड़ी बड़ी करें पर अन्दर ते खोखले है। नाम रख राखो है धन्ना सेठ और घर में भुंजी भांग हू नाय। जाई ए कह ते नाम बड़े और दर्शन छोटे। एक और है नेक सुई चुभो देयो तो गुब्बारे की सारी अकड़ फुस्स है जाबेगी। तो भईया ठोस बनो, फफ्फस मत बनो। न बातन ते और न कर्मन ते। ठाले बैठे फेंको मत बड़ी बड़ी, करो।करिबे को फल मिल ते। और एक जे हैं सरकाएंगे सींक हू नाय पर बात आकाश पाताल की करवा लेयो। टाइम टेबल तो रोज बनेगो पर अमल एक हू दिन नाय होयगो। ऐसेन ई कैत हैं शेख चिल्ली। सपने आकाश ते हू ऊंचे देखगे और काम रत्ती भर हू नाय करें। सो भैया, समय समय पे इन कहाबतन ने, कहन ए, लोकोक्तिन ने, मुहावरेन ने हू दोहराबो जरुरी है, इनते हू ज्ञान मिलो करे।

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