सफर जारी है.....946
27.05.2022
आप भी कमाल की बातें करते हैं, अरे उन्होंने पढ़ रखा होगा, उन्हें याद होगा कि जिसने करी शरम उसके फूटे करम और जिसने ओढ़ी बेशर्माई, उसने खाई दूध मलाई।सो जिनकी खाल गैंडे सी मोटी होती है ,उन्हें सुईं की चुभन महसूस ही नहीं होती।तेज से तेज पिन की नोंक भी भोंथरी हो जाती है।जान बूझ कर रोज एक कांड करना उनकी फितरत में शामिल है जिससे वे चर्चा में बने रहते हैं ।उनका सिद्धांत है पहले खूब ऊधम काटो,फिर उस पर लीपा पोती कर दो।अकर्मण्यता की भी हद होती है भाई,काम न करने के सौ बहाने और वजह गिनाने के हजार कारण तो ऐसे लोग जेब में रखे घूमते हैं।सौ दिन चले अढाई कोस इन पर पूरी तरह चरितार्थ होता है।।एक पैरा की टिप्पणी लिखने में कम से कम चार पांच घण्टे तो चाहिए ही चाहिए और फिर उस लिखे के क्रियान्वयन में एक दो दिन तो लगने ही है। पूरे सिस्टम में नकार जो घुली हुई है।अधिकांश की फितरत एक सी है बस किसी तरह काम से बचा जाए, उससे कन्नी काटी जाए।चोर चोर मौसेरे भाई हैं, सो नित नई नई चालें चलते हैं कि बस हाथ तक नहीं सरकाना पड़े।काले को सफेद करने की फुल प्रूफ योजना बनाते हैं और मान कर चलते हैं कि उनके इस स्याह सफेद की जानकारी किसी को नहीं होगी।खूब चतुराई बरतते कोई न कोई ऐसा सबूत छूट ही जाता है जिससे कलई खुल जाती है और सब पानी सा साफ हो जाता है।उन्हें ये भी गुमान है कि उनकी काली करतूतें किसी सीसीटीवी में कैद नहीं हो पायेगी,। उन्होंने कच्ची गोलियां थोड़े ही खेली हैं।पर वे बिल्कुल भूल गए हैं कि अगले ने कच्ची गोलियां नहीं खेली है, बाल भी धूप में सफेद नहीं किये हैं।उनकी आंखे सीसीटीवी से भी तेज हैं।चोर की दाढ़ी में तिनका इन्हें दिख जाता है।ये गर्दन तक कीचड़ में फंसे सच का सामना कर ही नहीं पाते, दो चार चोट में मुंह खोल देते हैं, सब सच उगल देते हैं।वो तो ये इस लिहाज में मरे जा रहे हैं कि सब अपने ही हैं, काहे को थुक्का फजीहत करो।पर उनके हौसले दिन प्रतिदिन बुलन्द होते जा रहे हैं। समझदार के लिए इशारा काफी होता है पर अगला निरा मूर्ख हो, अपना भला बुरा न सोच पाये, ज्यादा ही ख़ुट सयाना हो तो क्या किया जा सकता है, एक दिन ये करम ही ले डूबेंगे।न्याय की लाठी बडी बेआवाज होती है।अचानचक पड़ती है, बेभाव की पड़ती है, इतनी दनादन तड़ातड़ पड़ती है कि आप संभल भी नहीं पाते
ऐसा नहीं कि उन्हें पता न हो कि जो काम किये बिना खाता है, उसे अपच हो जाती है कि चोरी का सारा माल मोरी में चला जाता है कि ऊपर वाले की लाठी बेआवाज होती है कि भगवान के यहां देर है अंधेर नहीं कि पाप का घड़ा लबालब भरने पर ही फूटता है।पर वे अभी गहरी नींद और तन्द्रा में हैं। उन्हें किसी का कोई भय नहीं रहा, अपने आगे किसी को कुछ मानते नहीं, अभिमान की पराकाष्ठा है पर शायद उन्हें याद नहीं रहा कि अहंकार तो अति बलशाली रावण का भी नहीं रहा, उसे नेस्तनाबूद होना ही पड़ा तो तुम्हारी क्या हस्ती है।बस अपने दिन पूरे हुए ही समझो, बत्ती बुझने से पहले लौ बड़ी फड़फड़ाती है, बड़ी जोर से चमकती है और फिर हमेशा के लिए बुझ जाती है।
उन्हें बड़ा गुमान है कि हमारा कोई भला क्या बिगाड़ पायेगा,हमारी पीठ भारी है। वे नहीं जानते कि जिस भीत पर वे टिके हुए हैं , वह निरी बालू की भीत है।एक धक्के में ही ढह जाएगी।उन्हें अपने ज्ञानी ध्यानी होने का बहुत गुमान है, वे इतने भरे हुए हैं कि उन्हें कुछ सुनाई ही नहीं देता। सुनें तो तब जब कानों से रुई हटे।वे स्याह को सफेद करने की कला में माहिर हैं। उन्हें ये बोध ही नहीं कि परम् सत्ता तो कोई और है ,उसकी मर्जी के बिना तो पत्ता भी नहीं हिलता।बस दुष्टों का अंत जब नजदीक होता है तो बुद्धि घास चरने चली जाती है।कुछ सुनाई ही नहीं देता, बस सरपट दौड़ता है और ठोकर खाकर धड़ाम सीना गिर पड़ता है।उसकी नियति ही यही है।वे अपने को परम ज्ञानी मान बैठे हैं।हिरण्यकशिपु की तरह खुद को ही भगवान घोषित किया हुआ है।ईश्वर को वे मानते नहीं, परम् नास्तिक जो है।बस उनके जीवन में प्रह्लाद आना शेष है।जो स्वयम को सर्वेसर्वा मान बैठा हो, वह भला ईश्वर और उसके नामित प्रतिनिधि को कैसे स्वीकारेगा,उसकी हेठी नहीं हो जाएगी।तो अभी उन्हें फूली फूली चरने दो, उन्हें इस गलत फहमी में बने रहने दो कि उनकी पांचों घी में और सिर कढ़ाही में है।उनका किया बहुत जल्द सामने आने वाला है।फिर सिर धुन धुन पछतायेंगे पर क्या फ़ायदा।सांप के जाए पीछे लकीर पीटने से भला मिलता ही क्या है, बस ठेंगा ही न।तो वे अभी नासमझ है, उनके पाप के घड़े भरने में थोड़ा और वक्त बाकी है तो थमे रहिये ।जिन्हें अब शरम नहीं आती, वे इतने शर्मिंदा होने वाले हैं कि शरम को भी शरम आ जायेगी और उसे छिपने के लिए कोई ठौर ठिकाना भी नहीं मिलेगा। कह सुन कर अपना मुंह क्यों गन्दा करें, उनका पतन तो निश्चित है।बेशर्मों को ऐसी शरम आएगी कि मुंह छिपाने को जगह तक नहीं मिलेगी।तुमने कहना समझाना था सो कह दिया, अब तो बैठ के तेल और तेल की धार देखिए।आप तो चुप्प बैठ के तमाशा देखने की तैयारी करो।घड़े फूटने ही वाले हैं।