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Sunday, September 25, 2022

गर्व से कहो हम बुजुर्ग हैं

 22.09.2022

गर्व से कहो हम बुजुर्ग हैं......

प्रौढ़ता और बुजर्गियत आयु के ठीक वैसे ही पड़ाव हैं जैसे बचपन, कैशोर्य और युवावस्था। उम्र तो एक नम्बर भर है उसका जीवन के प्रति दृष्टिकोण से भला क्या लेना देना। पर नहीं, बार बार कह कर ये अहसास दिलाना जरुरी होता है कि अब आप बूढ़े हो गए हैं, आपकी ओल्ड एज है, इसलिए आप हमेशा मरे गिरों की श्रेणी में रखे जाने के लिए बाध्य हैं, आपको हर पल ये अहसास दिलाया जाता है कि तुमने अपनी जिंदगी जी ली, अब दूसरों के जीवन में दखल मत दो। एक कोने में पड़े रहो, जो मिल जाए या जो अहसान सा पटकते दे दिया जाए, उसे दया समझ के पेट में डाल लो । अपने जीवन अनुभवों को अपने पास सीमित रखो, ज़्यादा टोका टाकी करने की जरूरत नहीं है, एक कोने में कबाड़ की तरह डाल दिए जाओगे, दिन भर मौन , कौन, नोन के उपदेश सुनते रहो, मरीजी फीका और उबला खाना ही अब तुम्हारी नियति है। जो कभी अच्छा खाने को मन करे तो सुनो कि बुढ़ापे में जबान कैसी चटखारे ले रही है, चार मित्रो के साथ हंस बोल लो तो कहा जाएगा दिन भर कुछ काम धाम नहीं, बस सारे दिन पंचायत लगा के बैठे रहते हैं, कुछ नया, चटख पहन लो तो सुनने को मिलेगा बूढ़ी घोड़े लाल लगाम, थोडा गुनगुना लिए और ठुमके लगाने का मन हो गया तो फिर प्रलाप शुरू हो जाएगा.. अपनी उम्र का ख्याल करो, बूढ़ी हड्डियां कहीं चटख टूट गईं तो हमारी जान को खाट पकड़ कर बैठ जाओगे। कहीं जीवनसाथी के साथ चुहल कर ली तो आक्षेप लग जाएगा इन बूढ़ों को देखो, बुढ़ापे में रंगीनियां सूझ रही हैं। तो आयु के इस पड़ाव पर आपको बार बार ये अहसास कराया जाता है कि आपकी पारी समाप्त हुई, बस एक कोने में बैठ कर दिन काटो, नीरस से पड़े रहो और उम्र के इस आंकड़े पर आकर स्थिर हो जाओ, बार बार बेचारगी का आपको अहसास इस कदर कराया जायेगा कि एक दिन आप भी सोचने लगेंगे कि बस अब बहुत जी लिए, अब तो ईश्वर ले ले।

ईश्वर ले आपके दुश्मनों को, उम्र के इस पड़ाव का ये मतलब कब से हो गया कि आप बेचारगी से जीएं, कट रहे हैं दिना नुमा वाक्यों से जिंदगी के प्रति नीरसता उदासीनता प्रकट करें, जैसे तैसे जीएं, दूसरों पर बोझ से बने रहें, अगला आपको ये अहसास दिलाता रहे कि बस आपकी पारी ख़त्म, चुपचाप बैठो। बिलकुल नहीं, कदापि नहीं, बुजुर्ग और बूढ़े जरुर हुए हैं पर लाचार और बेचारगी का चोगा ओढ़े नहीं बैठे हैं। हमें सम्मान से जीने का पूरा हक है। जीवन के महत्वपूर्ण साल इस घर परिवार को दिए हैं, मेहनत से सींचा है इस फुलवारी को, कतरा कतरा जोड़ के ये इज्जत पाई है। अनुभवों की भट्टी में पके हैं, तप कर सोना बने हैं, निखर कर आए हैं। असली जिंदगी तो अब शुरू हुई है। अब तक तो परिवार को आकार ही देते रहे, आस औलाद को वक्त के सांचे में ढाल समाज उपयोगी बनाते रहे, उनके पैर मजबूत करते रहे, तमाम मारा मारी और व्यस्तता में लगे रहे। अब फुरसत के कुछ क्षण मिले हैं, उन्हें हम शान्ति और अपने तरीके से जीना चाहते हैं, बेचारगी के तमगे के साथ नहीं। तो बार बार ये अहसास दिलाना बंद करो कि हम बूढ़े हो गए हैं, हमारी ओल्ड एज है, हमसे अब कुछ नहीं होगा । अरे बढ़े बूढ़े हुए है, बुजुर्ग हुए हैं, लाचार नहीं, असहाय नहीं। इंद्रियां थोडा असहयोग अवश्य कर रही हों पर दिल दिमाग अभी बिलकुल दुरुस्त है। जीवन की दूसरी पारी को बिंदास जीने का जज्बा है। तो ये बेचारगी का चोगा तो हमें मत ओढ़ा ओ  कि हमसे कुछ नहीं होगा, हमें कदम कदम पे सहायता चाहिए। अरे शरीर अशक्त भले हुआ हो पर जिंदादिली बाकी है। मुर्दादिल क्या खाक जिया करते हैं। अब जाकर तो जीवन का अर्थ समझ आया है, साथ के असली संदर्भ समझ में भरे हैं और आप सब मिलकर, बुढ़ापे का माहौल रचाकर हमें नर्वस करने पर तुले हो। पूछ पूछ कर कह कह कर बार बार यही अहसास दिलाते रहते हो कि उम्र हो गई है, बुढापे में प्रवेश कर गए हो।

अब तुम्हें चांदी से सफेद बाल, कदमों की डुगलाहट तो दीख जाती है पर मन का उछाह नज़र नहीं आता। पचपन की संख्या समझ आती है पर बचपन का सा दिल नहीं दिखता। क्या हुआ जो बुजुर्ग, सीनियर सिटीजन हुए, अभी तो बहुत दमखम बाकी है, जमाने को बदलने का दम रखते हैं। सेकंड इनिंग के लिए, दूसरी पारी के लिए खूब तैयारी है। जीवन को अपने तरीके से जीने का समय तो अब है। ज़वानी में लिए गए संकल्पों को असली जामा पहनाने का असली मौका तो अब मिला है ।अभी तो बहुत कुछ करना बाकी है और तुम रोज बूढ़े बूढ़े की रट लगाए हो। जो जो जीवन की भगदड़ में छूट गया, उस सबको पूरा करने का सही समय तो अब है। तो तुम अपनी जिंदगी में मस्त रहो, हमें अपने हिसाब से जीने दो। हम तुम्हारी जिंदगी में दखलंदाजी से दूर रहें और तुम अपनी टोकाटाकी से। सब को इज्जत सम्मान से जीने का अधिकार है। सब जीओ और सबको जीने दो। होते होंगे वृद्धाश्रम, लोग भेज दिए जाते होंगे, मजबूरी लाचारी होती होगी उनकी। हम बरगे बुजुर्ग तो घर को ही आश्रम बनाने में यकीन रखते हैं , अपने जैसों को एक छत के नीचे लाने में विश्वास रखते हैं। बुजुर्ग होना सम्मान का सूचक है, बेचारगी और लाचारगी का नहीं।

बुड्ढा होगा तेरा......अभी मन जिंदा है, कुछ कर गुजरने का साहस उछाल मारता है, तो क्यों पिन पिन करते, रोते झींकते ज़िंदगी बिताई जाए। खुद जीओ शान से और दूसरों को जीने दो। ज़िंदगी बार बार नहीं मिला करती मेरे दोस्त, तो जब तक हो खूब जिंदादिली से जीओ, जाना तो निश्चित है पर जो पल तुम्हारे पास है उन्हें तो खुशी से जी लो।

गर्व से कहो हां, हम बुजुर्ग हैं, वृद्ध हैं, जीवन में खूब पके हैं, अनुभव समृद्ध हैं, तुम्हें हम से कुछ चाहिए तो लेने आ सकते हो, अवश्य देंगे, भरपूर देंगे पर हमें कोसना बंद करो, बुजुर्ग और बूढ़े बूढ़े का आलाप बंद करो। हम अकेलो को भी सम्मान से जीना आता है। तो गर्व से कहो हां हम बुजुर्ग हैं, वृद्ध हैं।

इत्ते उलायती हू मत बनो

 सफर जारी है....1533 18.06.2024 इत्ते उलायती हू मत बनो.... बिन पे तो मैया की कोख में हू नौ माह नाय टिको गयो,दुनिया देखबे की उलायत लग रही.पडब...