सफर जारी है.......991
12.07.2022
जाने बिगाड़ी, वो ही बनाबेगो.......
अब का होयगो राम जी, अब कैसे होएगी, मोये तो कछु समझ न आ रयो । बिट्टन को डकराते देख अम्मा बोली...चों हारी हारी सी बात कर रई है लली , सब राम जी संभालिंगे। बिगड़ी बे ई बनाबत हैं। नेक भगवान को ऊ नाम ले लो कर, सबन के आगे हाथ फैलात है, भगवान के आगे इतने हाथ जोड़ती तो तोय कछु न कछु उपाय जरुर सूझ जातो। भला आदमी की इतनी औकात कहां ते होएगी, वो तो निमित बन जात है पर बाय मदद करबे की प्रेरणा तो भगवान जी ही देवें। बाके मज्जी के बिना तो पत्ता हू नाय हिले, तू का बात कर रई है बिट्टन। इन मानुस के बस को कछु नाने, जिन्हें तो बस बेसिर पैर की हांकबे की आदत है। कछु करे चाए नाय करे पर जबान कतरनी सी खूब चलबा लेयो। कोई कोई होत ही ऐसो है कि करबे कू सींक हू नाय सरकाई जाएगी और बात आकाश पाताल की करिंगे। एक और मुसीबत हते ऐसेन के संग के अपने आगे काहू ए कच्छू नाय समझे। बस अपनी ही सेर रखनी बिन्हे, जब देखो तब अपनी ही पेलबे में लगे रिंगे। मैंने जे करो मैंने वो करो, ऐसेन को मैं तो सिर चढ़ के बोले। अपने आगे काहू ए कछु नाय समझे। कोई समझाबे की कोशिश करें तो बा ते अटक लड़ाई मोल लेबे कू तैयार बैठे रह। बातन में बिनते कोई जीत नाय सके। बात तो ऐसी करिंगे कि आकाश में हू थेगड़ी लगा आंगे पर काऊ काम की आस मत लगा बैठियो। बस जे तो बातन के ही शेर हैं। सो बहना मेरी ऐसेन से तो बच के ही रहो। जाई में भलाई है। और तू तो खूब समझदार है, पूरी गिरिस्थी पार लगा लाई , अब नेक दुख से ऐसी गैली बाबली हे गई कि हरेक के आगे अपनो रोनो लेके बैठ जात है। लोग रो के, सहानुभूति सी दिखाए के तेरे मन की थाह ले रए हैं, और तू पेट की ऐसी भोली है कि सबन के आगे कच्चो चिठ्ठा खोल के बैठ जाएगी। जे तो हमेहु सल है कि तो पे भारी विपत ओखा परी है पर दुख अपने रस्ता ही जायेगो। ऐसे घबराएगी तो कैसे होएगी। और सुन, ऐरे गैरेन की बातन में चो आ जात है, नेक काहू ने जूठे कू कई और तू सांचे कू आस लगा के बैठ जाएगी और कई म्हा ते सहायता नाय मिली तो रोएगी बिलखेगी बिना बात कू परेशान होएगी। अरे कहबो एक बात है और करिबो दूसरी। नेक अपनो दिमाग हू तो लगानो चहिए कि काऊ ने झूठ मूठ कू सहायता करिबे की बात कह दई तो बाके ही भरोसे बैठे रह गए। ऐसे तो कही ही जात है पर जाको जे मतबल थोड़े ही होत है कि अगलो बंध गयो, बाने कही चों, अब तो बाय करनी ही करनी पड़ेगी। ऐसे नाय होय करे।
तो बिट्टन हमाई मान, भगवान ते लौ लगा, बिनते ही दिन रात कहो कर कि भगवान तुमने ई बिगाड़ी है, अब तुम्ही बनाओगे। हमने तो तुम पे छोड़ दईं है। तुम्हे लगे कि सहायता करनी चहिए तो कर दीयो नाय तो जैसे राखोगे रह लिंगे। हमाई काय, हम तो तिहारे भरोसे हैं। हमाई मैय्या एक भजन गाओ कतती... पकड़ लेयो हाथ बनवारी नहीं तो डूब जाईएंगे, हमारो कछु न बिगड़ेगो तिहाई बात जायेगी। तो बिट्टन रानी, दुख होय चाए सुक्ख बस भगवान जी में जी लगाए राखो, अपनी पतवार अपनी डोर बिन्हें सौंप देओ और तुम ते जो बन पड़े जितनो हो सके, जितनी सामर्थ्य होय उतनो कर देओ । बाकी वे जाने बिनको काम जाने। तो हमने तो बाके हाथ डोर सौंप दई है। और बिट्टन रानी तू सुखी रहबो चाहे तो तोय ऊ जे ही करनो चहिए। जाने बिगाड़ी है वो ही बनाएगो।