सफर जारी है........1003
24.07.2022
देखि दिना को फेर.........
जब हवा का रुख विपरीत दिशा में हो तो ताकत लगाने की बजाय चुप बैठना ज्यादा फायदेमंद है। तेज हवाओं को दूसरी दिशा में मोड़ पाने में अपनी सारी शक्ति लगा देने से ज्यादा बेहतर है तेज तूफान में घास की माफिक जमीन पर लेट जाना और तूफान के गुजर जाने पर जिजीविषा से सिर ऊंचा कर खड़े हो जाना। जो अकड़ के एवज में ऐंठ के मारे पैठ कू जाते हैं , वे अपनी शक्ति भी बेजा करते हैं और ठनठन गोपाल रह जाते हैं तो स्थितियां अनुकूल न हो तो कुछ समय के लिए शांत भाव में बैठना ज्यादा श्रेयस्कर है। कौन दिन बारह मास एक समान रहते हैं। दिन की तो छोड़ो, सबको शीतलता देने वाला चंदा भी एक समान कब रहता है, कभी घटते घटते बिल्कुल विलुप्त हो जाता है तो कभी सोलह कलाएं बढाते बढाते अपने पूर्ण रुप में शोभित होता है और पूर्णिमा के चांद सा अभिहित होता है, सबका प्रेमासप्द बनता है और सब उसे देख अर्घ्य देते व्रत का पारण करते हैं।
चंद्रमा वही रहता है पर दिनों का फेर उसे मावस से पूर्णिमा की यात्रा करा देता है। और चांद को देखो न विलुप्त होता टूटता है और न पूर्ण होता उछलता है। जानता है वह कि जब पूर्णिमा ही शाश्वत नहीं होती तो अमावस की काली रात कौन लम्बी बनी रहने वाली है, कभी तो काली अंधियारी रात ढलेगी और सुबह का सूरज सारे तमस को चीर जगत को रोशन करता दिपदिपाता प्रखर तेज सा सबको आंख चोंधियाने पर विवश कर देता है। सो जब जब संक्रांति काल हो चुप लगा जाओ, ज्यादा बहस में मत पड़ो, तर्क वितर्क मत करो क्योंकि यह बेकार की बहस को जन्म देगा और परिणाम शून्य का शून्य रहेगा।
तो कभी कभी सब आते जाते, जानते बूझते मौन होना ज्यादा सुखकर होता है। उस समय को उका जाइए , ज्यादा तीन पांच मत कीजिए, कोई सफाई स्पष्टीकरण मत दीजिए क्योंकि जो आपको समझते हैं उन्हें समझाने की, तर्क वितर्क करने की जरूरत नहीं और जो मन में रेसा पाले बैठे है, वे आपको हर बात पर गलत ही ठहराएंगे चाहें आप रत्ती भर भी दोषी न हों। तो सामने वाले को ये अवसर मतहो दीजिए कि वह आप पर हावी हो सके, बात बात पर आपको नीचा दिखाने की कोशिश करे, आपको यह अहसास दिलाए कि आप आज जो भी कुछ भी सब उसके रहमो करम पर हैं। तो किसी से भी अनड्यू मत लीजिए। जितना है अपनी झोली में, उसी में गुजारा करना सीखिए। भीख से कभी किसी का पेट नहीं भरा करता और मान लो एक बार को पेट भर भी जाए तो नीयत कभी नहीं भरा करती, नादीदे की तरह हमेशा हाथ फैलाए खडा रहता है।
तो करते रहिए अनासक्त भाव से कर्म, मत बंधिए किसी लालच से, अपने बाहुबल पर भरोसा बनाए रखिए, कर्मवीर बने रहिए और संभल संभल कर चलते रहिए अपने निर्दिष्ट पथ पर । जो आपको समझना नहीं चाहते, वे आपके लाख समझाने पर भी नहीं समझेंगे। रहीम को दोहराते रहिए चुप हो बैठिए देख दिनन को फेर, जब नीके दिन आइए तनिक न लागे देर।