सफर जारी है....1533
18.06.2024
इत्ते उलायती हू मत बनो....
बिन पे तो मैया की कोख में हू नौ माह नाय टिको गयो,दुनिया देखबे की उलायत लग रही.पडबे बिठालो तो एक साल में दो दओ क्लास लांघ मारी.सबरी बी ए एम ए बीएड एमएड चुटकी बजाते कर डाली.मौको लग गयो तो पी एच डी हू कर डाली.इनके उलायतीपन की कछु मत पूछो बस में सबसे पहले बैठिंगे और उतरबे के बिरिया हू सबन ते पहले गेट पे ठाढे हे जांगे.कहूं गीतन सीतन में जानो होय तो ढोलक के ढिंग बैंठिंगे.सबके ध्यान में आ जाने चहिये कि हम हतें.पढबे कू गये तो सबते आगे की सीट पे बैठनो है बस रेल में खिडकी की सीट चहिएजे समझ लेयो कि जहां जानो वहां नंबर एक पे ही रहनो. उलायती ऐसे कि मुंह ते बात बाद में निकरे काम पहले हे जायगो.
अब तीसरो पन आ गयो पर उलायत से पीछो नाय छूट रहो.सुबह पैर पसारे तब तक तो सब रजको तज करके धर देनो.जे वही ना सल पडे कि ऐसे उलायती सोबे कौन से खन करे.दस से पांच की सरकारी चाकरी हंसी खेल नाय होय करे कि गये और देहरी छू के भाज आये.मगज मारनो पडे.ऐसे ऐसेन ते झड्ड लेनी पडे कि कछु पूछो ही मत .पहले वहां मगज खप्पी करो और फिर आ के सपेरा समेटो.सबन ने मालूम है करेगी अपे आप.वाहे तो करबे को शौक है.करे बिना निठे नाय बाकी.बाय चहिये सबरो रज की तज,सब काम टैम ते हे जानो चहिये.पेंडिंग रखबो पसंद नाय.और काहे कू कल कू छोडे,निबटानो तो हमें ही है.तो नेक देर सबेर जग के कर लिंगे.सोएंगे तो चैन ते.धुकुर धुकुर तो नाय लगी रहेगी कि अब का होयेगो.सो भैय्या चाहे कछु कह लेयो जो मज्जी नाम धरो हम तो ऐसी ही हैं.इतनी बीत गई सो थोडी और बची होयगी वो हू बीत जायेगी.जानो तो हती है हम कौन अमर मूल खाके आये हैं.
उलायत को तो जे हाल है कि जो काम महीना भर बाद होनो है बाको लेसन प्लान आज ही बन जानो चहिये.एक काम पूरो होय तब तक दूसरे की रुपरेखा दिमाग में गोल गोल चक्कर काटबे लगेगी.जे नाय कि एक काम हे गयो तो नेक देर लोट पीट लेयो,मूड फ्रेश कर लेयो.सो नाय कुचुर कुचुर कछु न कछु काम में जुटे रहो लगे रहो.जा उलायती के दिमाग में इत्ती सी बात नाय भर रही कि उलायत करके कछु मैडल नाय मिल रहो.कछु बढाई नाय मिल रही ,कहुं ऊंचो ओहदा नाय मिल रहो.ऐसे ही सिर्री से लगे रहो काम में.जुटे रहो.यहां तो उरद पे सफेदी हू नाने.काहू ए फर्क नाय पड रह्यो.सब धक्का दे दे के आगे बढे जा रहे हैं और जे उलायती मैया इंच भर हू नाय सरक रहीं.ऐसो ठस्स दिमाग पायो है कि काम तो सबरे कर दिंगी पर अपने मुंहद मियां मिठ्ठू बननो नाय आबे.अपने बारे में आप ही कहते फिरो कि हमने जे करो वो करो तो जामे कौन बढाई है.अरे तिहारो काम ऐसो होनो चहिये कि दुनिया बाकी चर्चा करे.
काम करबे में उलायती होनो ठीक.होगो पर परिणाम के काजे नेक धैर्य राखिबो चहिये.चक्की थोडे ही है कि इधर से अनाज डालो और उधर से पिस के बाहर निकल आयो.कर्म करिबो तुम्हआरे हाथ है फिर उलआयती करो चाहे सीरे धीरे बने रहो.परफल तो अपने निश्चित समय पर ही मिलेगो.बीज बोओ तो पौधा बनबे में समय लगो करे .दही जमाओ तो नेक देर लगे .जे नाय कि बार बार उघाड के देखबे लग जो कि जमो कि न जबो कि रोज मिट्टी खोद खोद के देख रहे हैं कि जड जमी के नहीं ,अंकुर फूटो के नाय.सब होयगो पर समय लगेगो.माली सींचे सौ घडा फल तो रितु पे होय.सो उलायती मैया काम में खूब उलायत बरतो पर रिजल्ट। तो अपने टैम पे ही निकलेगो.
No comments:
Post a Comment