Showing posts with label लो कल्लो बात. Show all posts
Showing posts with label लो कल्लो बात. Show all posts

Sunday, June 16, 2024

लो कल्लो बात

 [14:18, 16/06/2024] Bina Ji Agra Hindi: सफर जारी है....1532

15.06.2024

लो कल्लो बात ....

 काफी अरसा हो गया कि आभासी पटल से ही पता लगता है कि आज कौन सा दिवस है.आज की  नई खबर क्या  है मौसम का हाल क्या है कहां बारिश होगी और कहां लू चलेगी.कहां कौन जीता है कौन हारा है.कहां बस रेल दुर्घटना हुई और देकान रिहायशी इमारत में आग लग गई, तूफान आया ओलावृष्टि हुई.सारी सूचनाएं  मोबाइल कहे जाने वाली   इस छोटी सी चमकदार डिबिया में आकर केंद्रित हो गई हैं.

.आपके हाथ में मोबाइल हो लैपटॉप या टैब फिर आपको न अखबार न  रेडियो न टेलीविजन न कैमरा न घडी कैलकुलेटर   और  न कलेंडर की  जरूरत रह जाती है. अब सब कुछ एक छोटी सी डिब्बी में समा चुका है.भूत वर्तमान भविष्य बताने में इसका कोई सानी नहीं है.समाचार पत्र की खबरें पुरानी पड जाती हैं इसके आगे.पहले तो सिनेमा हाॅल ही बंद हुए अब तो बाजार भी इसकी हद में आ चुके हैं.आपको कहीं जाने और कुछ करने की कोई जरुरत नहीं,बस फोन के सारे फंक्शंस समझ लीजिये और दो चार एप डाउनलोड कर लीजिये.जिंदगी बहुत आसान हो जायेगी.

पर ये आधा अधूरा सच है .भर भर झोली सामान भले हो प मन बहुत खाली हैं.पिता दिवस पर शुभकामना संदेशों की बाढ तो निश्चित है पर बहुत से पिता घर से बाहर कर  धकिया दिये गये है . यदि उन्हें वृद्धाश्रम में नहीं धकेला गया है तो ज्यादा इतराइयेगा मत ,घर पर ही उन्हें अजनबीपन अनुभव कराया जा रहा है कि अब तुम्हारे दिन लद गये.एक कोने में चुपचाप पडे रहो.दोटाइम की रोटी दे दी जायेगी.वह व्यक्तित्व जिसकी धमक से घर गुंजार रहता था जिसने एक एक ईंट जोड खाली प्लाॅट को अपनी मेहनत मजदूरी से घर बनाया था आज अपने ही घर में वह फालतू आइटम सा हो गया है.बडे किस्मत वाले होते हैं वे पिता जिनकी संतान पिता का अदब करना जानती है,जो पिता का सम्मान करना जानते हैं ,उनके साथ बेअदबी नहीं करते,बात।             ष बात में झल्लाहट नहीें  झूटती.घर से बाहर निकलते जो पिता को प्रणाम कर पैर छू उनका आशीर्वाद लेना नहीं भूलते.पिता स्वर्ग है पिता प्रीति है.हमारा अस्तित्व पिता से है ,पिता है तो हम हैं.वही हमारा पालक है.मां का लाड दुलार दिखता है पिता कहता भी कम है और जतताता भी कम है.ऊपर से नारियल सा कठोर क्यों न हो पर अंदर से गिरी सा मुलायम और मीठा होता है.

ये सब खुद पिता होते अनुभव होता है .हमारे अपने पिता के साथ जो भी आचरण रहे हों  हमें रत्ती भर  फर्क नहीं पडता .पर वही सब कुछ हमारे साथ दोहराया जाता  है तब बड़ी पीडा होती है.ये तो परिवार के संस्कार हैं जो एक.पीढी से दूसरी में ट्रान्सफर होते हैं.आज का सच ये है कि परिवार के साथ साथ आसपड़ोस और मित्र मंडली और उस सबसे अधिक जैसे परिवेश में वे चौबीस घंटे रहते हैं जैसा दिन भर देखते सुनते हैं वही वाक्य सांचे उनके मन मस्तिष्क में फीड हो जाते हैं.पिता केवल.सुविधा प्रदाता.भर नहीं होता .वह आपको संस्कारित भी करता है.दुनिया का हर पिता अपनी परिस्थिति में बेस्ट करता है पर हर पीढी को पिता से कुछ न कुछ शिकायतें रह ही जाती हैं और वह प्रण लेता है कि मैं अपनी संतान को किसी भी  बात की कोई कमी नहीं रहने दूंगा .सामर्थ्य भर सब करते हुए भी कुछ न कुछ छूट ही जाता है और बच्चों के मन में असंतोष पनपता है कोई न कोई गांठ रह ही जाती है.शायद यही चक्र है संसार का..अपनी बात करें तो सीमित साधनों में पिता ने हम बच्चियों के लिया सच में उनकी सामर्थ्य से कहीं बहुत अधिक था.बस एक ही कसक रह गई कि जिंदगी भर झोली फैलाए लेते और लेते रहे.पिता जो थे वे और वह भी उस पीढी के जिसमें बेटी के घर का पानी पीने में भी गुरेज था.संतति पिताओं को भला क्या दे पायेंगी उनके लिए तो इतना ही बहुत है कि वह उनका आदर  मान बनाये रख सकें.लो और कल्लो बात  शुभकामनाएं दो मत दो पर  उनके प्रति सम्मान आदर भाव हमेशा बनाओ रखो.उनके साथ तमीज से पेश आओ,संयत और मर्यादित भाषा का प्रयोग करो.चीखो चिल्लाओ मत .आखिर वे आपके पिता हैं.

इत्ते उलायती हू मत बनो

 सफर जारी है....1533 18.06.2024 इत्ते उलायती हू मत बनो.... बिन पे तो मैया की कोख में हू नौ माह नाय टिको गयो,दुनिया देखबे की उलायत लग रही.पडब...