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Tuesday, July 19, 2022

जहां सुमति तहँ संपत्ति नाना

 सफर जारी है....934

14.05.2022

रामचरित मानस की एक चौपाई की अर्धाली भी यदि जीवन में उतार ली जाए, तो जीवन जीना आसान हो जाता है,जीवन में चमत्कारिक परिवर्तन हो जाता है और बहुत सी समस्याओं के समाधान स्वतः मिल जाते हैं।पर हम मूर्ख अनेको बार अखण्ड पाठ करते भी निसंग से रहते हैं।लो जी बस आपने कहा तो हमने पड़ लिया।अनेको बार पढ़ते दोहराते बहुत कुछ कंठस्थ भले हो जाए पर उसके भाव को समझने और अंगीकार करने करने में हम असमर्थ ही रहते हैं क्योंकि उसे अर्थ सहित कभीग्रहण ही नहीं किया जाता, बस संगीत की जोरदार ध्वनि के मध्य हम भी उन्हें मात्र उच्चरित करते रहते हैं।मंगल भवन अमंगल हारी, द्रवउ सुदशरथ अजिर बिहारी के सम्पुट का अर्थ भी नहीं जान पाते।

किसी भी घर, समाज और देश की उन्नति के लिए सुशासन बहुत जरूरी है, आपसी सद्भाव परस्पर सौहार्द और एक दूसरे के प्रति समझ आवश्यक है और यह समझ आती है सुमति से।सुमति के साथ ही कुमति जुड़ी हुई हैं।दोनों मनुष्य के ह्रदय में निवास करती हैं।कुमति सुमति सबके उर रहहीं, वेद पुराण निगम अस कहहीं।बस जिस क्षण जिसका प्राधान्य हो जावे, व्यक्ति उसी के अधीन हो जाता है।कैकई तो राम को भरत से बढ़कर मानती थी पर मन्थरा की कुटिलता ने उनके अंदर की कुमति को हवा दे दी, उनमें ऐसा जहर भर दिया, अपने पराये की ऐसी पट्टी पढा दी कि वह दशरथ से प्राणप्रिय राम के लिए चौदह वर्ष का वनवास और भरत के लिए राजगद्दी मांग बैठी।औरस पुत्र भरत के लिए राजगद्दी की मांग तकतो ठीक था पर कुमति ने उन्हें राम के प्रति इतना विषाक्त कर दिया कि वे उन्हें चौदह वर्ष के वनवास पर भेजने के लिए तुल गई।अब ये बात अलग है कि इस जिद से केवल उनके हाथ पति का स्वर्गवास और पुत्र की घृणा ही आई।

तो जब जब कुमति का आधिपत्य होता है, कुछ न कुछ अनर्थ होता ही है।सो बार बार कहा गया बुद्धिमान बनो।पढने लिखने से समझ विकसित होती है इसलिए बार बार दोहराया जाता रहा कि चार अक्षर लिख पढ़ लो, लोगों में बैठने लायक हो जाओगे।मत पढो ज्यादा, अक्षर ज्ञान ही ले लो, गीता रामायण तो बांच सकोगे, वक्त जरूरत अपने को लिख बोलकर व्यक्त तो कर सकोगे, अपनी बात तो रख सकोगे पर अफसोस कि बड़ी बड़ी डिग्री और प्रमाणपत्र के पुलिंदे भी सामान्य समझ न जगा सके।समझ तो जब जगती तब ऐसी नीयत होती।यहां तो नीयत में ही खोट था सो कहने सुनने के लिए पट्टी और कॉपी पर सदा सच बोलो, झूठ मत बोलो, बड़ों का आदर करो, चोरी चकारी मत करो, आपस में मत लड़ो, मिलजुल कर रहो जैसे वाक्य खूब जमा जमा के सुंदर लेख में लिखते अवश्य रहे हों पर उनका रंचमात्र असर असली जीवन में न ला पाये।उस सबको तो बस पास फेल और अंकों तक ही सीमित कर दिया।जीवन उनके बिना भी दौड़ रहा हो तो उनकी वक़त भी क्या होती भला।ये तो भला हो उन ठोकरों का जिन्होंने जीवन का असली गणित सिखा दिया।बहुत भटकने के बाद जीवन जीने के असली सूत्र हाथ लगे कि जहां सुमति तहँ सम्पत्ति नाना, जहां कुमति तहँ विपत्ति निदाना।

       जो घर को स्वर्ग बनाना चाहते हो, सुखी रहना चाहते हो तो सुमति को जगाए रखो, दुर्बुद्धि से बचो, दूर रहो, उसकी तरफ भूल से भी मत देखो, दरवाजे खिड़की सब बन्द रखो, ये तो जरा सी सन्द में भी घुस आते हैं, बड़े लुभावने लगते हैं, मीठी मीठी चिकनी चुपड़ी बातें करते हैं, मिठबोले होते हैं मुख में राम बगल में छुरी रखते हैं, विष रस भरा कनक घट जैसे होते हैं ।इनसे जितनी दूरी बरतो उतना ही अच्छा।इन्हें तो पास भी मत फटकने दो।जैसे ही गलत सलत विचार आये उसे झटक दो।ये तो हर क्षण घात लगाए बैठे रहते हैं कि व्यक्ति जरा असावधान हो तो झपट्टा मारे, अपनी गिरफ्त में ले लें और जो एक बार इनके चंगुल में फंस गए तो सहज नहीं छूटते, फिर सहज मुक्ति नहीं मिला करती।कुमति का मार्ग बहुत आकर्षक और लुभावना है, जल्दी फंसा लेता है अपनी गिरफ्त में।तो ऐसों की संगत से  ही तोबा कर लो,दूर से ही हाथ जोड़ दो कि हम तो ऐसे ही भले, हमें ज्यादा चाहिए भी नहीं, इसी में आराम से गुजर बसर हो रही है।दोनों समय भरपेट खाते हैं, सिर पर छत और पांवों के नीचे जमीन है,सुख दुखमें साथ निभाने को अपने हैं, मिल बैठने को चार रिश्तेदार और मित्र है, शरीर ढकने को वस्त्र हैं, ओढ़ने बिछाने को सब व्यवस्था है, पैर में उपानह है सिर पर टोपी है, जीवन जीने को और क्या चाहिए भला।और फिर संतोष तो अंदर आता है। सन्तोषी सदा सुखी।बस ये सुमति बनी रहे, कुमति से बचाब हता रहे, बस प्रभु से यही प्रार्थना है।भूलें न कभी इस जीवन सूत्र को जहां सुमति तहँ संपति नाना, जहां कुमति तहँ विपत्ति निदाना। जीवन के इस मूलमंत्र को पकड़े रहें।बस नैया पार लग ही जाएगी।राधा रानी की कृपा से भवसागर पार हो ही जायेंगे।हमारो धन राधा श्री राधा श्री राधा, गोपाल धन राधा श्री राधा श्री राधा।

इत्ते उलायती हू मत बनो

 सफर जारी है....1533 18.06.2024 इत्ते उलायती हू मत बनो.... बिन पे तो मैया की कोख में हू नौ माह नाय टिको गयो,दुनिया देखबे की उलायत लग रही.पडब...