सफर जारी है...1007
27, 07.22
धीरज धर ले मेरे मना......
धैर्य और शांति दो ऐसे गुण है जो किसी भी व्यक्ति के जीवन को बदल कर रख देते हैं। कुछ में ये जमजात होते हैं तो कुछ विकसित कर लेते है। जीवन है तो दुख, कष्ट, मुसीबत, विपत्ति कभी भी आ सकती है पर इनके प्रति आप कैसा रिएक्ट करते हैं, सारा दारोमदार इस पर निर्भर करता है। जो आने वाली विपत्ति को पहले ही सूंघ लेते हैं, वे उससे बचने के उपाय में जुट जाते हैं। बेबात का हो हल्ला नहीं मचाते। विपरीत से विपरीत स्थिति में शांति बनाए रखते हैं। वे समाधान सोचते हैं कि ऐसी स्थिति में क्या क्या किया जा सक्ता है। दूसरे हमेशा शिकायती स्वर लिए रहते हैं, इस उस की आलोचना कराते रहते है, सभी में दोष खोजते रहते हैं। वे छोटी से छोटी समस्याओं को पहाड़ के रुप में देखते है और दिन भर उसका रोना रोते रहते हैं। समस्या का विश्लेषण उसे आधा कर देता है बल्कि कई बार तो समस्या होती ही नहीं,उसे कल्पना कर क्रिएट कर लिया जाता है। जब करने को कुछ सार्थक सा नहीं होता तो दिमाग बेबात की बात में अधिक समय लगाता है। समस्या को रचता पचता है।
ऐसे लोगों को देख शेख चिल्ली की कहानी बहुत याद आती है जो केवल कल्पना लोक में रहता है और अपना ही नुकसान कर लेता है। शेखचिल्लियों की कमी थोड़े ही हैं, एक खोजो, अनेक मिल जायेंगे। वे अनजान बने रहना चाहते हैं। खुद विपत्तियों को आमंत्रण देते हैं। उनमें न धैर्य होता हैं न शांति। बस तिल का ताड़ बनाने में माहिर होते हैं। ऐसे लोगो से दूर की रामराम भली। समस्या का होना उतनी बड़ी बात नहीं है पर आप उस को लेकर कैसे विचार रखते हैं, ये जरूरी है। एक मुसीबत तो यह है कि हमने लोगों को अलग अलग खांचों में बांट रखा है, अपने पराए के वर्ग बना रखे हैं इसलिए किसी भी बात पर वस्तुनिष्ठ तरीके से नहीं सोच पाते। और जब हमारी दृष्टि में ही दोष है तो स्थितियां सुलझने के बजाय लगातर उलझती जाती है।
जीवन में धैर्य बनाए रखना बहुत जरूरी है। जो आपत्ति काल में भी शांत बने रहते हैं, विचलित नहीं होते, धैर्य से काम लेते हैं, स्थितियों का सही विश्लेष्ण करते है, वस्तुनिष्ठता से काम करते हैं, उनके लिए बड़ी से बडी समस्या भी चुनौती नहीं होती। ये दो गुण धैर्य और शांति आपको अनेक समस्याओं से बचा ले जाते हैं। धीरज अपने आप आता है, आपके अंदर से आता है, दूसरा इसे आप में इंजेक्ट नहीं कर सकता। बस सामने वाला तो आपको धैर्य बंधा सकता है, अपने अनुभव शेयर कर सकता है, बहुत हुआ तो समझा सकता है पर निर्णय तो आपको ही लेना होता है कि आप जीवन को कैसे जीते हो। ये जो अथाह धन संपत्ति वालों को तुम सुखी समझे बैठे हो, उनके अपने दुख हैं। वे तुम्हारी समझ में नहीं आएंगे, तुम तो उन्हे बाहर से देख सकते हो, उनके कष्टों का अंदाजा नहीं लगा सकते। बात दुख कष्ट की है भी नहीं, बात है हमारे दृष्टिकोण की कि हम कितने सकारात्मक हैं, किस प्रसंग को किस रुप में ग्रहण करते हैं। तो बनाए रखिए मन में धैर्य और शांति और गाते गुनगुनाते रहिए.... धीरज धर ले मेरे मना। धीरे धीरे रे मना धीरे सब कुछ होय, माली सींचे सौ घड़ा फल तो रितु पर होय, भैया मेरे सो धीरज बनाए रखो, सब सही हे जाएगो।
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