Wednesday, April 27, 2022

अशेष होकर भी शेष होते हैं पिता........

 सफर जारी है....833

31.91.2022

वे पिता हैं,नश्वर देह भले छूट जाती हो पर वे जिंदा रहते हैं अपनी संतानों में, बंट जाते हैं थोड़ा थोड़ा उनके बीच, किसी की कद काठी में तो किसी के बोल व्यवहार में।साथ कुछ नहीं ले जाते बस अकेले परम पिता से जा मिलते हैं और फिर वे हमारे लिए परम् पिता हो जाते हैं ।जब जब बच्चे पुकारते हैं वे चले आते हैं दौड़े दौड़े,नहीं देख पाते अपने बच्चों के कष्ट उनकी पीड़ा उनके दुख दर्द, सहला जाते हैं सिर को, दे जाते हैं थपकी, भर जाते है आत्म विश्वास, दिखा जाते हैं राह, पौंछ जाते हैं आंसू और भर जाते हैं जिजीविषा कि मुसीबतों से घबराते नहीं, उनका डटकर सामना करते हैं बच्चे, छोड़ते नहीं सेच की राह, लोग कुछ भी कहते रहें, बना रहना अडिग अपने रास्तो पर क्योंकि वह सच का रास्ता है।कोई कितने भी प्रलोभन दे मत आ जाना बहकावे में, मत भट्के जाना गलत रास्तो पर, सच्चाई का रास्ता थोड़ा टेढा और कष्टप्रद भले हो पर अंत में मंजिल तक पहुंचा ही देता है।मत आ जाना किसी की चिकनी चुपड़ी बातों में,लोग चुग्गा लगाकर जाल फेंकेगे तुम्हें फंसाने को पर सावधान रहना।अपने को बचा कर रखना।मित्र बनाने में सावधानी बरतना,मुख में राम बगल में छुरी रखने वालों से सावधान रहना और भी न जाने क्या क्या समझा जाते हैं हर पुकार पर।वे भर जाते हैं हर बार आत्मविश्वास अपने बच्चों में, दिलासा दे जाते हैं कि तुम अकेले कहां हो, ईश्वर हर क्षण हर पल तुम्हारे साथ है।

सच पिता ऐसे ही होते हैं, पुण्यतिथि पर पिताजी को याद करते हमेशा लगता है कि वे हमें आशीष दे रहे हों सदा सुखी और सौभाग्यवती रहे मेरी बच्ची।जब जब पिता अपनी गोद में बिठा दुलरा देते हैं, पिडडी पर चढ़ा मेला तमाशा घुमा लाते हैं, बहुत समृद्ध और मालामाल हो जाती हूँ मैं। हम छह भाई बहिनों के आधार स्तम्भ पिता के कंधे खूब मजबूत थे, रीढ़ की हड्डी सीधी थी, सरकारी मुलाजिम थे, हम बच्चों को जितना भरपूर दे सकते थे दिया।लोग पूछते थे कि बेटियों के ब्याह में क्या क्या दहेज दिया, दुनिया की नजर में उन्होंने जो दिया वह किसी की आंखतर आया हो या नहीं पर ये तो हम बच्चियां जानती हैं कि पिता ने शिक्षा दीक्षा के जो संस्कार हमें दिए, त्याग बलिदान का जो पाठ पढ़ाया, गलत से समझौता न करने की जो हिदायत दी, कम में संतोष करना सिखाया, दूसरों के आगे हाथ फैलाने की सख्त मनाही कर दी, अपने बूते आगे बढ़ना सिखाया, कुछ छोटे बन कर दूसरों को मान देना सिखाया, बड़ों का आदर इज्जत करने की सीख दी, धोखेधड़ी की ककहरा भी नहीं सिखाया, हमेशा रचनात्मक बने रहने के लिए प्रोत्साहित किया, जीवन जीने के छोटे छोटे सूत्र हंसी खेल में हाथ में पकड़ा दिए, नाते रिश्तेदारी में साथ ले जाते न जाने कितनी कितनी कहानी किस्से सुनाए, रास्ते में हर पड़ाव की जानकारी दी, व्यवहार करना सिखाया, बताया जब भी किसी से मिलो दुआ सलाम पहले जरूरी है, उसकी राजीखुशी पूछो,उसे पानी पत्ता दो तब अपनी बात कहो।जो बोलो स्पष्ट बोलो, गोल गोल मत घुमाओ।समझदार बनो, बात बात पर रूठो मटको मत, किसी की चिरौरी भी मत करो, बस अपनी बात रखना सीखो, जो मिले उसी में खुश रहो।

ऐसे पिता जिसके पास हों वे बच्चे बड़े मालदार होते हैं।ऐसे पिता गढ़ते हैं अपनी संतानों को कुम्हार माली और बढ़ई बन कर।बच्चों में काम की परिश्रम की आदत डालते हैं।याद आता है घर के कामों में कुशल बनाने की जिम्मेदारी मां की थी तो बाहर बास के कामों को पिता समझाते थे कि सौदा सुलफ खरीदते बाजार भाव पता करो पहले, दो चार दुकानदारो से भाव पता कर लो, क्वालिटी चैक कर लो,सब्जी लेने गए हो तो तरोताजा खरीदो, भिंडी की नोंक तोड़कर या घीया में नाखून गढा कर सब्जी की परख करना उनसे ही सीखा।गेंहूँ पिसाते जाते तो स्पष्ट निर्देश होता कनस्तर /टीन का भजन अलग कराना, देखना तराजू में पासंग न मार दे।जब वे थके हारे आते तो हम बच्चे पैरों से उनकी पैरों की खूब खुंदाई करते।हमें सिखाया बताया गया कि बड़ों का कहना मानो वक्त जरूरत उनकी सहायता करो,वे तुम्हारे माता पिता हैं, तुम्हारे लिए सारा दिन मेहनत करते हैं तो जब वे बीमार हैं अस्वस्थ हैं कष्ट में हैं उन्हें अटेंड करो, उनकी जरूरत पूछो, उनकी सेवा सुश्रुसा करो, उनका आशीर्वाद लो, वही तुम्हारे काम आएगा।

ऐसे थे मेरे पिताजी, पिताजी आप बहुत याद आते हो।वैसे ये भी सच है कि आप कहीं नहीं गये, हमारे आसपास हमारी यादों में बसे हो।पिता कहीं जा भी नहीं सकते, हम उनके आत्मज आत्मजा जो हैं।आपको शत शत नमन पिताजी।

No comments:

Post a Comment

इत्ते उलायती हू मत बनो

 सफर जारी है....1533 18.06.2024 इत्ते उलायती हू मत बनो.... बिन पे तो मैया की कोख में हू नौ माह नाय टिको गयो,दुनिया देखबे की उलायत लग रही.पडब...