Tuesday, July 19, 2022

जागे फिर न डसैहों........

 सफर जारी है......923

01.05.2022

भक्त अपने प्रभु से भांति भांति से निवेदन करता है।कभी रूठ जाता है तो कभी तायने उलाहने देता है।और जब कैसे भी नहीं सुनाई होती तो पहले स्तुति अभ्यर्थना करता है, रोता गाता है, अपने को दीन हीन बताता है कि तुम दयाल दीन हों तुम दाता मैं भिखारी या मैं सब पतितन को टीको, और पतित सब दिना चार के मैं तो जनमत ही को या अब लों नसानी अब न नसैहो, राम कृपा भव निसा सिरानी जागे फिर न डसै हों या गर्भ में उल्टा लटका खूब पुकारता है कि बस प्रभु एक बार इस नरक से मुक्ति दे दो फिर जीवन भर आपको याद करूंगा पर जगत में आते ही माया बांध लेती है, नाते रिश्तों के बंधन में जकड़ जाता है और गर्भ में प्रभु से किया वायदा भूल जाता है ठीक वैसे ही जैसे मुसीबत में तो राम याद आते हैं और जैसे ही विपत टली तो हम अगन मगन हो जाते हैं, फिर कोई कहां याद रहता है भला।ऐसा नहीं होता तो कबीर को क्या पड़ी थी जो वे दुख में सुमिरन सब करे लिख लिख कर काले कागज करते रहते।जब ज्ञान होता तो पश्चाताप करने लगते कि प्रभु जी गलती हो गई, बस एक बार बस इस बार नैया पार लगा दो फिर तेरी डोर कभी नहीं छोड़ूंगा कि प्रभु जी मेरी नैया पार लगा दो, भवसागर में फंसी है नैया इसको बाहर निकालो।उस समय तो जाने कौन कौन से नाम याद नहीं आ जाते।विघ्नहर्ता गणेश से लेकर जय हनुमान ज्ञान गुन सागर, जै कपीश तिहुँ लोक उजागर, कभी जै शिव जै शिव, भोले बाबा, जै माता दी, राम राम, कृष्ण कृष्ण सब जुबान पर भाग भाग के आ जाते हैं, उस क्षण केवल और केवल बस एक सहारा दीखता है मेरा कोई न सहारा बिन तेरे, नन्द लाल संबरिया मेरे, प्रभु आ जाओ प्रभु आ जाओ बस मुझको दरस दिखा जाओ की रट लग जाती है।

भगवान जी बच के रहना इन भक्तन ते, जिनको कोई ठिकाना नाये, अबही तुम्हारी विरुदावली गाएंगे  कि दुर्योधन की मेवा त्यागी साग विदुर घर खायो, जब जब भीर पड़ी भक्तन पर नङ्गे पांव हि भाजो।जे तो तुम्हें ऐसे ही नचाएंगे। सुनी तो होगी कि परमपिता ए छछिया भरि छाछ पे ब्रज गोपिन ने परमपिता हू ए नाच नचा दयो कि पहले नाच के दिखा तब माखन मिलेगो।इनकी बातन में मत आ जइयो प्रभु जे तो पल में तोला पल में मासा हैं।अबही आंसू बहा रये हैं और अगले ही खन सुख पा के तुम्हें बिसार दें।कुंती ए सब पतो हतो ताई ते तो कह दई सुख के माथे सिल परे जो भगवद नाम भुलाय, और बलिहारी जा दुक्ख कू जो पल पल नाम रटाय।तो प्रभु जी तुम तो इन भक्तन ए एक न एक विपत्ति में अटकाये ही रहो करो, इन्हें सल हू तो पड़नी चहिये कि बिना प्रभु जी के जे कितनो अकेलो है।और सब तो चार दिना के साथी है जैसे ही हंस उडो,चोला छूटो सबे घर ते बाहर निकारबे की जल्दी मच जाबे कि मुर्दा है, जाहे जल्दी ते जल्दी फूंको पजारो।वो तेरो प्यारो सो बेटा हत काये चार जनन के संग काठी में बांध के कंधा पर धर के राम राम सत्य कहतो सूधो मरघट में जाके तोय फूकेगो पजारेगो तेरी कपाल क्रिया करेगो और इतने ते हू पेट न भरे, राख ठंडी होत खेम अस्थिन ने बीन बान के एक घड़ा कलश में धरि के लाल कपड़ा बांध के गंगा जी में प्रवाहित कर आयगो।तेरहीं कर के सालाना श्राद्ध कर आबेगो और अपनी दुनिया में अगन मगन है जायेगो, बहुत याद आबेगी तो फोटू पे माला चढ़ा देगो।और तेरी तिरिया दरवाजे तक रोती पीटती आबेगी संगी साथी श्मशान तक चले जाबिंगे पर साथ में कोई न जा सके। जे दौलत इकठ्ठी करबे में लगो परो काये कछू संग नाय जायेगो।जब हंसा अकेलो उड़ जायेगो, संग तेरे नहि कोई जायेगो।बस प्रभु जी को नाम ही जाए तबही तो बीमार होते खेम कहो करे कि राम राम रटो भैया।तब तो बड़े भाव ते भजन गावेगो इतना तो करना स्वामी जब प्राण तन से निकले, गोविंद नाम लेके मेरे प्राण तन से निकले,मेरे मुख में गंगाजल हो उसमें भी तुलसी दल हो।जब प्राण कंठ आये कोई रोग न सताए मुख से राम राम गाये।पर कहां सम्भव हो पाताहै ये सब, मरणासन्न को भी वेंटीलेटर पर धर कृत्रिम सांस देते रहते है शायद बच जाए।बीमारी में कहां राम रटे जाते हैं।तो बस जब तक सांस है तब तक हर सांस पे उसका सुमिरन होता रहे।

इन भक्तन की बातों में मत आ जइयो प्रभु, जे बड़े बनाऊ हैं।अबही जो टसूबे बहा रये हत काये, तुम्हें सिमर रहे हत काये जैसे ही बिपत टली सब भूल भाल जाएंगे।जे तो सब कहबे की बात है कि अब लों नसानी अब न नसेहो, राम कृपा भव निशा सिरानी जागे फिर न डसेहो।ऐसे तो कही ही जाए प्रभु अपनो काम निकारबे कू।पर जे सच नाय।तो इनते पहले त्रिवाचा भरवाबो बहुत जरूली है कि बोल लाला सांची सांची कह प्रभु के नाम ए रटेगो कि नाय।पर हमारे प्रभु तो बड़े भोलेभाले हते नेक लोटा भर जल ते ही खुश हो जाबे तभी तो बिन्हे भोले भंडारी कहो करे और वो छलिया तो राधे राधे कहबे ते ही चलो आबे कि राधे राधे कहो चले आएंगे बिहारी, आएंगे बिहारी चले आएंगे बिहारी।राधा मेरी चन्दा चकोर हैं बिहारी कि राधे राधे कहो।तो सब मिल के बोलो राधे राधे श्याम मिला दे इतने ते ही तर जाओगे।तुम चाहे जितने मर्जी दुष्ट है जाबो पर प्रभु जी तो समदर्शी हते।सो गाते रहो प्रभु जी मेरे अवगुण चित न धरो, समदर्शी प्रभु नाम तिहारो चाहे तो पार करो।एक लोहा पारस में राखत एक घर बधिक परो, जे दुविधा पारस नहीं जानत कंचन करत खरो कि प्रभुजी मेरे अवगुण चित न धरो।एक नदिया इक नार कहावत मैलो नीर बहो, जब मिलि एक वरण भई सुरसरि नाम परो कि प्र

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