सफर जारी है...941
22.05.2022
बस सब जी का महिमा है साब,ये जी जो न करा ले थोड़ा है।नाम और सरनेम के साथ जोड़ दो तो आपको इज्जत के सबसे ऊंचे पायदान पर बिठा दे,आया जी, हांजी कह दो तो आपको तमीजदार सिद्धकर दे, जी में एक और जी लगा दो तो बहन और जिज्जी बना दे।दो जी के बीच जा लगा दो तो जीजाजी का प्यारा रिश्ता दे दे, जिस मर्जी संबोधन और रिश्तेदारी में जोड़ दो आपकी खूब नामबरी हो जाये।जी हां ये जी ही है जो कभी आपके जी को जी में ला देता है तो कभी जी का जंजाल बन जाता है।
जो जीभ कतरनी सी चलाती रहो तो तुम्हें कभी भी चारों खाने चित्त कर दें और किसी की जी हजूरी में लग जाओ तो तुम्हारी जिंदगी बदल कर रख दे।जी कारा लगाकर बोलो तो तुम्हारी ज से जयजयकार होती है।ज से मीठी मीठी गोल गोल घुमाबदार जकेबी है तो ज से जीना भी हराम हो जाता है।ज से जीवन में जीत मिलती है तो ज से हमारा जी कभी कभी खो भी जाता है और आप गाते डोलते हो जाने कहाँ मेरा जिगर गया जी, अभी अभे यहीं था किधर गया जी।जी चाहे तो आपको बहुत मान दिला दी और ज्यादा ही जी जी करने लग जाय ओ तो अगले की नजर से ही गिरा दे कि देखो बिना रीढ़ का सा सारे दिन जी जी की पेपनी सी बजाता रहता है।सबको सिर पर ही चढाये रहता है।अब देखो छोटे बारे और सेवकों से जी लगाकर बोलने का कौन सा धर्म है पर नहीं साब आपने इतनी बात कह दी तो उनके श्रीमुख से प्रवचन शुरू हो जाएंगे अरे क्या हुआ जो उसे नौकर जी कह दिया कि रिक्शा वाले को भैया जील संबोधित कर दिया ,क्यावह इंसान नहीं है, क्या वह हमारा जरखरीद गुलाम है जो आपके आगे हाथ जोड़े हरदमभीगी बिल्ली बन कर खड़ा रहे, आपकी चाकरी करता रहे, आपकी जी हजूरी बजाता रहे, आपके आगे पीछे डोलता रहे।अरे भाई उसकी भी इज्जत है।कभी अचानचक उसके घर पहुंच जाओ फिर देखो अपने घर का राजा है वह, उसका परिवार कैसे उसे इज्जत से नवाजता है, बालक पिताजी पिताजी कहते नहीं थकते तो पत्नी ऐसी आज्ञाकारिणी हैइतना सम्मान देती है हमारे ये के अलावा उसके पास कोई दूसरा संबोधन ही नहीं है।तो भाई जो तुम्हें जी कारे से पुकारता है उसे जीकारे से पुकारने वालो की संख्या भी कम नहीं है।
ये छोटा सा जी कितने कितनों का दिल जीत लेता है।देखन में छोटे लगे पर बड़े गहरे अर्थ छिपाए रखते है।कहने की टोन ही बता देती है कि ये आदर सम्मान वाला जी है या प्रश्वाचक या खिल्ली उड़ाने वाला या उलाहने वाला या स्वीकारोक्ति वाला।किसी की लंबी चौड़ी बात सुनकर आप उत्तेजित हुए बिना केवल जी कह आमने वाले को बहुत कुछ सोचने पर विवश कर देते हैं कि ये जी समझ आने के लिए है या इसका कुछ अन्य अर्थ निकलता है।सामने वाले को सोच में डाल आप उड़नछू हो जाते हैं।ये जी हां जी छोटा सा जी कितनो कितनो को दुविधा में डाल देता है कि इतने लंबे व्याख्यान के बाद इस छोटे से जी से क्या आंकलन किया जाये।तो पकड़े रहिये इस जी को ,जीकारे को, बड़ा काम का है ये।आपको बहुत सारी मुसीबतों से बचा ले जाता है।सुनते हो जी बहुत प्रचलित है जिसको सुनते ही पति महोदय चौंक जाते हैं कि इस जी के ब्याज से पता नहीं कौन सी नई मांग रख दी जाए और जी का जंजाल खड़ा होजाए।सुनते हो जी बडो बडो और अच्छों अच्छों की खाट खड़ी करने की सामर्थ्य रखता है।
तो ये है जी की महिमा।नाम के साथ लगे तो सम्मानीय बना दे और दुष्ट के नाम के साथ लगा दो तो लक्षणा व्यंजना का भाव दे दे।रावण जी कंस जी सूपनखा जी नहीं सुना न कभी, अब मां बेटे के नाम के आगे जी लगाकर बोले तो कैसा पराया सा लगता है।अरे अपनो बच्चों का पिताजी है पर तुम्हारा तो लाडेसर ही है न।जी जरूर लगाकर बोलो, जी कारे से बोलो पर किसी की इतनी जी हजूरी मत करो इतने बिछे बिछे मत रहो कि अपना सम्मान ही न रहे।तो चलते हैं जी, कल मिलते हैं जी, अपना ख्याल रखना जी।
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