सफर जारी है.....954
04.05.2022
काहू ते कितनो हू वैर होय, लड़ाई झगड़ा हे जाय, बोलचाल बन्द हे जाबे पर मिले पीछे राम राम जरूर करो, नाराजगी अपनी जगह होय और शिष्टाचार अपने ठीया।जे ही छोटी छोटी बात तो आदमी ए बडो बनाबे।और देख भैया चौबीस घण्टा मुंह फुला के रहबो ठीक नाय, कछू बात है गई,चार बता सुना देयो चार सुन लेयो पर दिल में धर के मत बैठे रह्यो, अरे कह कबा के वई की वई खतम कर देयो।ऐसो कितनो समय लिखा के लाये हो कि सबन ते लड़ भिड़ के फूल के बैठे रहो।कछु न जाओ करे संग में। खाली हाथ ही जानो है सो भैया सबन ते बोल बतराते रहो करो।जाते लगे हमारी नाय बन रई तो चुप लगा गए।पर रोज रोज को रोबो झींकबो, लड़बो भिड़बो ठीक नाय होय करे लाला। अरे काहू ने दो बात बढ़ती कह लई तो का तुम ते चिपट गई, धूल डालो बापे और आगे कू बढ़ लेयो।जाने कही सबरो दोष तो वई ए लगो करे।तुम तो झाड़ झूड के आगे चल देयो।कहां तक रखे रहोगे इन बातन ने दिमाग में।
हां, एक फायदा तो है जाबे कि बातन ते अगले आदमी को स्वभाव पतो चल जाबे।सुनी तो होयगी तुमने दमड़ी की हाडी तो गई2
पर कुत्ता की जात तो पता चल गई।तो एक बार कू अपनो नुकसान करके हू बात समझ आ जाबे, दूसरे को स्वभाव पतो चल जाबे तो इन दामन में सौदा चोखो ही समझो।कम ते कम हमें पतो तो चल गयो कि अगलो कितने पानी में है, हमें ले के बाकी का सोच है।तो मुँहबादी करबे ते ज्यादा अच्छो हे चुप लगा जाओ, अपने काम ते काम रखो।बकन देयो अगले ने, कह कबा के अपनी गन्दगी ए बाहर निकाल के चुप है जायेगो ससुरो।हम चों अपनी जबान गन्दी करें।इतनी तो सबन ने सल है कि जापे जो होय वोही तो सामने वाले ए परोसेगो।खट्टो मीठो, तीखो, चरपरो, कड़बो।तो जे मान लेयो कि अगले के मन में इतनी घृणा भरी परी है कि अच्छे बोल निकले ही नाय।जब मुंह खोले विष भरे वचन ही बोले।ऐसेन के मोड़े ते कभहू ढंग की बात नाय निकरे।तो आदमी ए समझबो जरूरी है।बाकी जात समझबो जरूरी ऐ।अरे वा जात पान्त की बात नाय कर रई,कबीरा ने कही काय--जात पांत पूछें नहिं कोई, हरि को भजे सो हरि को होई।फिर सबके खून को रंग तो एक ही होय करे, सबको जन्म हू समान तरीका ते होय, तो कोऊ काहू जात को होय हमें बाते कछू लेनो देनो नाय।बामे इंसान कछू नाय कर सके, जा घर में जन्म मिल गयो, वो ही बाको स्वर्ग दाखिल है।मैया बाप तो भगवान ते हू बड़े होय करें।कहत नाय का पहले घर की मैया ए पूजो तब पहाड़न वाली ए पूजिबे जानो चाहिये।जे नाय की घर की मैया ए तो बूढ़ेन के आश्रम में छोड़ आये और खुद चल दए वैष्णो देवी, अरे पहले बाय देखो जो तुम्हें जा जगत में लाई है, कैसे कैसे कष्ट सहे हैं तुम्हे बडो करिबे में तुम्हाई नींद सोई जांगी है, खुद चाये भूखी रह गई होयगी पर तुम्हारो झेन्दा जरूर से भर दीयो होगो।तो बाको मान करोपहले तब कहीं जइयो।जा बात ए तो गांठ बांध लेयो कि जो अपने जन्मदाता को सगो ना भयो वो कौन को होयगो।
सो आदमी ए समझबो बहुत जरूरी है, बाको स्वभाव बोली भाषा से सब पतो चल जाबे कि कितनो गहरो है।एक बार कूअपनी गांठ का पैसा जरूर चलो जाबे पर सामने वाले की की असलियत तो जान जाओगे।इन दामन में जे सौदा बुरो नाय। एक बार काहू के स्वभाव ए जान जाओ तो फिर दुख न होय करे।फिर हम बाय ज्यादा भाव नाय देबे, कहतो रह, बकबो कर, हमाये ऊपर रत्ती भर हू असर नाय होय, जे तो है ही ऐसो।जाके मुंह लगबे ते कछू फायदा नाय, अपनो ही टैम खोटो करनो है।काठ की हांडी चूल्हे पर बार बार नाय चढो करे ,मौका बार बार नाय दयो जात , आदमी ए रोज रोज नाय परखो जात, एक कनी ते ई पतो चल जाबे कि खिचड़ी पकी है कि नाय।तो जब अगले की पोल पट्टी पतो चल जाए, आंखिन पे बंधी अज्ञान की पट्टी खुल जाए ,अगले ए समझ जाओ तो फिर रोज रोज काय क्लेश मत पालो, ऐसेंन ते अटको ई मत, अपनो रास्ता बदल लेयो।अपनी अक्कल बेच के काम मत करियो, सुनो सबकी पर करो बाये जो तुम्हें ठीक लगे, अपनी आत्मा की बात जरूल ते सुनो। लगे। अपने मन के अंदर झांको, बहुत सी गलत बातन ते छुटकारो मिल जाये करे।जे बात समझ आ गई तो आधी से ज्यादा काय क्लेश तो वैसे ही दूर है जाबे और जे मान लेओ कि तबहू कोई औगार लग जाए तो बाए राम पे छोड़ देयो।बिनकी शरण में चले जाओ, गात बजात रहो मेरी लाज तेरे हाथ, अब तू ही पत रखियो भगवन, अपनी सी खूब कर लई, अब नाय सिपट रई, तुम्हीं संभालियो प्रभु जी।
तो सौ बातन की एक बात है पहले तो काहू ते अटको मत, सबन ते रामा श्यामा करो, राजी ते बोलो, और फिर भी अगलो नाय माने तो बाके हाल पे छोड़ देयो पर अपनो मुंह मत खराब करो उल्टी सीधी बक के, सब राम जी पार लगात है।
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