सफर जारी है....925
02.05.2022
दुनिया में दो ही सम्बन्ध सर्वोपरि हैं मालिक और मजदूर का, स्वामी और सेवक का, बड़े और छोटे का, ताकतवर और कमजोर का,संपन्नता और गरीबी का।एक इसलिए श्रेष्ठ ठहरता है क्योंकि दूसरा हीन है, एक ताकतवर इसलिए है क्योंकि दूसरा कमजोर है, शोषक इसलिए है क्योंकि कोई शोषित है, उत्तीर्ण का महत्व अनुत्तीर्ण के परिप्रेक्ष्य में ही है।यदि सब एक से हो जाते तो कोई किसी पर शासन कैसे कर पाता, कोई किसी से बड़ा कैसे ठहर पाता।कल मजदूर दिवस पर श्रम के बोझ से दबे बेबस मजदूरों के चित्र, कविता, आलेख की खूब खूब प्रदर्शनी लगी।कभी बाल मजदूरी की बात की जाती रही तो कभी श्रमिकों के अधिकार पर खूब कलम दौड़ी, उनके इतिहास रेखांकित किये जाते रहे,उनके प्रति सहानुभूति और संवेदनाओं का बाजार खूब गर्म होता रहा, चर्चाओं में मजदूर ही मजदूर समाया रहा,मालिक मजदूरों के आगे उसके श्रम का दशांश देते भी अपनी मूंछों को मरोड़ मरोड़ ताव देते रहे कि देखो इन्हें हम ही तो पाल रहे हैं, हम न होते तो कब के मर खप गए होते,कीड़े मकोड़े की तरह जीवन बिता रहे होते।
बार बार मंथन चलता रहा कि सबका मालिक एक और सबका साईं एक कहते हम रोज किसे स्मरण करते हैं, यदि ये मिल मालिक हम मजदूरों के माई बाप हैं तो इनका भी तो कोई मालिक होता होगा, हम इनकी चाकरी करते हैं तो ये भी तो किसी की चाकरी करते ही होंगे, जैसे मालिक हमें दुत्कारते हैं, ज्यादा काम लेकर कम मजदूरी देते हैं और कभी कभी तो वह भी डकार जाते हैं, कितनी उपेक्षा से हमें देखते हैं, अपने को राजा और हमें प्रजा समझते हैं तो क्या कोई इनका मालिक नहीं होता होगा, कि क्या कोई इनकी मेहनत की कमाई नहीं डकार लेता होगा ,कि क्या कोई इन्हें दुत्कारता फटकारता नहीं होगा ,कि क्या कोई इनसे भी बड़ा नहीं होता होगा,कि क्या ये भी किसी के चाकर नहीं होते होंगे, कि क्या इनका भी कोई मालिक नहीं होता होगा।जरूर से होता होगा तभी देनहार के नैन नीचे झुके रहते हैं और एक हाथ से दिया दूसरे हाथ को भी पता नहीं चलता।देनहार कोई और है भेजत है दिन रैन, लोग भरम हमरो करें ताते नीचे नैन।सबको देने वाला बादशाह अकबर भी अल्लाह से हाथ फैला कर मांगता ही है और उसे मांगते देख सहायता मांगने आया व्यक्ति लौट जाता है कि जब ये ही मंगता है तो भला मुझे क्या देगा, एक मंगता दूसरे मंगते को भला क्या दे सकता है।तो मांगना ही है तो उससे ही मांगो जो सबको देता है, सबका दाता है।दाता एक राम भिखारी सारी दुनिया कि राम एक देवता दुखियारी सारी दुनिया।ज्ञान का प्रकाश जब अंदर जगायेगा, प्यारे श्री राम के तू दर्शन पायेगा, जोत से जिसकी है उजियारी सारी दुनिया।दाता एक राम भिखारी सारी दुनिया।
तो जो ये बार बार कहा जाता है कि दुनिया में सब बराबर है, कि कोई छोटा बड़ा नहीं है,कि सब में एक ही परमात्मा का अंश है , कि वही सबकी रक्षा करता है ,कि जब कोई दुशासन किसी द्रोपदी का चीर हरण करता है तो कान्हा स्वयम उसका चीर बढाने आ जाते हैं ,कि किसी गज को जब ग्राह पकड़ लेता है तो राम उसे बचाने स्वयम आ जाते हैं ,कि होलिका बुआ प्रह्लाद को जलाकर मारने के लिए आग की लपटों के बीच उसे गोदी में लेकर बैठती तो है पर उल्टा हो जाता है वह स्वाहा हो जाती है और प्रह्लाद बच जाता है,कि जब प्रह्लाद को ऊंचे पहाड़ों से धकेला जाता है, पानी में फेंक दिया जाता है पर कोई उसे बचा लेता है क्योंकि उसे सब जगह यहां तक कि खम्भे में भी हरि दिखते हैं और प्रह्लाद के विश्वास की रक्षा के लिए हिरण्यकशिपु के वध के लिए प्रभु स्वयम नृसिंह के रूप में प्रगट हो जाते हैं, कि हिरण्यकशिपु को मिले वरदान कि न दिन में न रात में न भीतर न बाहर न देवता से न दानव से न अस्त्र से शस्त्र से वह मारा जा सकता है तो दोनों बखत मिले आधे नर और आधे सिंह के रूप में बीच देहरी पर न अस्त्र से न शस्त्र से बल्कि नाखूनों से उसके शरीर को फाड़ देते हैं। मीरा को मारने को राणा विष का प्याला भेजते हैं और प्रेम दीवानी मीरा उसे अमृत समझ पी जाती है ,उसका बालबांका भी नहीं होता,कि विष का प्याला राणा जी भेजा पीबत मीरा हांसी रे, पग घुंघरू बांध मीरा नाची रे।
सब निश्चिन्त रहो कि जो हमारा मालिक है जिसके हम मजदूर कहे जाते हैं, वह भी किसी का मजदूर ही है, उसका भी कोई मालिक जरूर है।जैसा आचरण वह हमारे साथ करता है ,अगले के साथ वैसा करने को कोई पैदा हो ही जाता है।कोई अपनी खीझ हम पर उतारता है तो वह भी किसी की खीझ का शिकार निश्चित ही बनता है।तो अपने अकेले को श्रमिक मजदूर मानते लजाने की कोई जरूरत नहीं, सब के सब मजदूर ही हैं, सब श्रम ही करते हैं फिर चाहे हाथ पैर का हो या दिमाग का, शारीरिक हो या मानसिक बौद्धिक हो, बिना श्रम के भला किसको मिला करता है।जो बार बार दूसरों को देख ये सोचे बैठे हो देखो उसके तो बड़े मजे हैं, कैसे बैठा बैठा रोटी तोड़ रहा है, उसके अपने कर्म हैं, कभी कर आया होगा तो फल आज मिल रहा होगा क्योंकि किये बिना तो किसी को कुछ नहीं मिला करता।तो ये मजदूर दिवस श्रमिक दिवस हम सबका साझा दिवस है क्योंकि मूलतः तो हम सभी श्रमिक ही हैं और हम सबका मालिक भी एक ही है।सबका मालिक एक।
No comments:
Post a Comment