सफर जारी है....963
14.06.2022
फेर मत कहियों पैले चों नाय बताई.........
सुनी तो होयगी कि दान की बछिया के दांत नाय देखे जात ।अब दान तो दान ठहरो ,आदमी अपनी सिद्धा आस्था के कारन देत ए ।कोई जबरदस्ती थोड़े ई है दे दे नाय दे, बाकी मज्जी । वहां तुमाई हेकड़ी को कोई काम नाय कि हमकू जे चहिये वो चहिये,जे अच्छो नाय वो अच्छो नाय।ऐसो वैसो नाय पसन्द तो अपनी अंटी ढीली करो, जेब खाली करो।दूसरन के ऊपर चों लदे भये हो। तुमे नाय चाहिए तो और काऊ ए दे दिनगे ,तुमी थोड़े रह गए हो कि नाक भौंह ऊ सिकोड़ो ,नखरा दिखाओ ,तायने उलाहने मारो, ऐंठ के मारे पैंठ कू जाओ और अगलो तुम्हाई चिरौरी करतो रहे। फिर तुम कौन घर के दामाद लगत हो जाय पहले तो कलेजे को टूक निकार के देयो, डला भर के लदाय देयो तो हू पेट नाय भरे। छोरा ब्याहबे आबिन्गे और ऐन मौका पे ऐसी अनकटोंटी मांग धर दिनगे कि बेटी बारे के होश उड़ जाबे।कि के तो कार देयो दरबज्जे पे कि बारात लौट जाबेगी ।वो तो जे कहो कि अब छोरिन ने समझ आ गई है कि जाको पेट इत्ते पे ना भरो तो का जरूरी है कि जे मांग आखिरी होय ।जो कैते कि एक बार कुत्ता के मोंह खून लग जाए तो वह फिर माने नाय।फिर तो वह आदमखोर है जात है।जे तो भली भई कि अब लरकी उ साफ साफ कह देत है हमें नाय जानो ऐसे लालची के साथ, हम तो बिन ब्याह भले,ऐसे लालची के संग बंध के हमें अपनो जीवन नाय बिगाडनो।मान लेयो जा टैम महतारी2बाप ने कज्ज लेके कहूँ ते इंतजाम करहू दयो तो जे तो जीवन भर माँगेगो, मंगता है जे तो, हम कहां ते जाको मोंह बन्द करिंगे ।हम तो ऐसे ही भले अब बारात लौटे तो भले ही से लौट जाए पर बाप ए जों अपमानित होत तो नाय देखो जात, आखिर कू तो बाप है हमाये।
और दूसरी बात सुनो जब हाट बाजार में एक के साथ एक फ्री मिलो करे तो कैसे झट सीना ले लेत हो,बहस तो नाय करत, चुप सीना धर लेत हो, और जे कह के मन में तसल्ली कर लेत हो कि इन दामन में का बुरो है।जितनो जेब अलाउ करे ,उतनो ही तो करत हो खर्चा, फिर बामे एक की जगह दो मिल जाए तो मन कैसे हरखा जात है, बांछे खिल जात है, मन कैसो फूल सो हल्को हो जात है, बार बार जे कह के अपई पीठ ठोक लेत हैं देखो कैसो बेबकूफ बनाओ,पैसा एक को दयो और सामान दो ले आये।मूरख हो तुम तो निरे,को दे देगो तुम्हें एक के भाव दो।जो मिल जाए बाए जेब में धर के चलते बनो।तुम्हें कछू करनो नाय परि रयो, जो मिल जाए बामे शुकुर मनाओ।काहे कू
नाक भौंहन ने सिकोड़े से रहत हो, अगलो भलमनसाहत में किये जा रहो है और तुम्हाई आंख तर नाय आ रयो।जब देखो तब काऊ न काऊ बात ए मुद्दा बना लेत हो।नेक सोचो जो मिल रयो है बापे तुमाओ कछू अधिकार नाय।वो तो अगले की भलमनसाहत और सदाशयता हती, बड़प्पन हतो,परिवार के संस्कार हते, सबते मिल जुल के रहनो चाती, तो चुप ई सब करत रहत है कि छोड़ो सब अपने ई है।अब अगलो हू जो बांट हिस्सा पे उतर आए, अपनो तुपनो करे तो कैसी होयगी।सब घमण्ड धरो रह जायेगो। सो ज्यादा भिनभिनाओ मत।अगले कू टिनटिनाओ मत,चौबीस घण्टा पैना से मत मारो करो।बाय हू ए दो घड़ी चैन लगन दयो।अगलो कछू ना कह रयो तो तुम्हें तो इतनी समझ होनी चहिए है कि मीठे गन्ना ए इतनो मत निचोड़ो कि फफ्फस के अलावा कछू नाये बचे। रहनो तो तबऊ पडेगो तो ज्यादा अच्छो है अगले को हू नेक ख्याल रखनो जरूली है।फिर कल कू मती कहियो कि पैले चों न बताई ।
अब बार बार नाय किंगे एक ई बात ए।बहुतेरो समझा लयो।समझ में भर गई होय तो कर लेयो नाय तो तिहाई मज्जी।हमारो तो कहने को काम हतो तो भैया हमने तो कह दई अब तुम जानो और तुमाओ काम।अब नाय किंगे साहब बिल्कुल हू।
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