Wednesday, August 17, 2022

प्यार मनुहार की दावतें

 सफर जारी है....९८६

०७.०७.२०२२

प्यार मनुहार की दावतें.....

तो सुनो किस्सा हमाए गांव की दावत को। छोरा को ब्याह हतो, माड़े की दावत चल रई, अब माड़ो जानत हो कि नाय, छोरा के मामा भात लाए करे बा दिना माड़ो गाड़ो जाय, दामाद  नाय तो फूफा गमला में एक बांस गाड़ो करें, बापे पत्ता छा के सजायो जाय, बाके नीचे ही ब्याह के सबरे काम होय करे। जे वरनी को गीत तो खूब सुनो होयगो....मडये के बीच लाडो ने केस सुखाए, बाबा चतुर वर ढूढो सुघढ वर ढूंढो दादी लेंगी कन्यादान, लाडो ने केस सुखाए। माड़ो मंडप ते कहबे, ब्याह तो मंडप में छये में ही पढ़ो जाबे, फेरा, कन्यादान सब रीत वहीं होबे। कछु सल राखो करो। पर तिहारी हू गनती नाने, आज को माने इन बातन ने, झट सीना कोरट मैरिज कर लेबे और महतारी बाप हू करे तो ऊ दस बारह दिना के ब्याह चार घंटा में निबट जाबे। पहले की तो बात ही और हती, कम से कम पांच दिना की तो लगुन ही निकलती कबहू कबहू तो सात दिना के ग्यारह दिना की हू हो जाती। घर में पीसना होतो,हल्दी फोड़ी पीसी जाती खल्लड मूसली ते ,सूप में कलाबा बांध के गेंहू फटके जाते, हथलगुन बनती, खीकड़ी बताशे कौमुरी मेंहदी बांटी जाती,  थापे धरे जाते, रतजगा होतो , ढोला गबते ....चिड़ी तोय चामरिया भावे, घर में सुंदर नार बलम तोय पर नारी भाबे दुपट्टा रेशमी।बैयर बानी खोइया करती खूब हंसी मजाक चलतो, गाली गबती, ढोलक पुजती। अब काऊ पे टैम ही नाय तो सब गड्डमद्द है गयो, बस दो घंटा में सब निबट जाबे। और का कहते बाय लेडीज संगीत बामे कोई गीत न गाबे बस सबरी डेक बजा के उल्टो सीधो डांस करे।

             का कह रए और कितकू भटक गए, अब जे  दिमाग ही तो है कभी कितकू चलो जाए और कबहू कितकू। तो हम तुमकू ज्योनार को किस्सा सुना रये। पत्तल बिछ गई है, कुल्लड़ सकोरा भोलुआ धर दए हैं। तुमने पत्तल पे पानी छिड़क लयो है , काऊ लंग ते शोर उठ रयो है भईया पत्तल बदल देयो, कुल्लड़ तो चुचा रयो है, सकोरा की किनोर झड़ रई है, हमकू तो न्यो सो दे दे। अब परसवैय्या आ गए, कासीफल को हरी अमिया डाल के साग बनो है, आलू को लपटेबा साग है, अब झोल आ गयो साब, सन्नाटो ऊ परसो जा रयो है। अब दही बूरा को नम्बर लग गयो, सकोरा में ताजो गाड़ो गाड़ो दही भर दयो और खोंच भर के बूरा डाल दयो है।  बूंदी के लडुआ, रसगुल्ला, रबड़ी मीठो धरो जा रयो हैं। अब गरमा गरम पूरी कचौरी को नम्बर लग गयो है। जेमो साब की पुकार लग गई है, पत्तल के भोजन में से पांच कौर निकाल के बापे जल छिड़क के मोंह में हाथ देनो शुरू हे गयो है। अब दुबारा परसवाई शुरू हे गई है। अब सुनो परोसबे और खबवैया के बीच को वार्तालाप रायतो रायतो.... नाय तो, पूरी.....रख दूरी ,जे पूरी लियात है हर पोत, जा किचोरी लिया एक नरम गरम सी, दही बूरो.... भोलुआ भर दे पूरो , रबड़ी....धर जा सबरी। पूरी कौन खाए जब रबड़ी जैसो तर माल सामने होय, रबड़ी झिक पेट खा लई तो अब लडुआ और गुलाब जामुन को नम्बर लग गयो और जा पाछे सन्नाटो पीयो जा रयो है धकापेल। अब पंगत उठ रई है, पत्तल दोना सकोरा समेटे जा रये हैं। अब दूसरी खेप तैयार ठाढी है। सांझ तक जे ही रेलमपेल मची रहेगी। फिर दूसरे दिना बारात की तैयारी शुरू हे जाएगी। ब्याह वाले घर में निरो काम होय करे, शहरन की तरह बाप महतारी ए हाथ बांधे बाबूजी मैम बने घूमबे की फुरसत नाय होय करो। पूरो गांव ब्याह के कामन में हाथ बंटाए करे।

              तो ऐसी होत करे, हमाए बिरज के गांव की दावत, घूम जइयो कबहू टैम होय तो। पर तुम पे टैम कहां होयगो, टैम की ई तो किल्लत है। कित्तो सारो काम फैलो परो है, बाय समेटे कि तुमायो किस्सा सुने। तुम पे तो कछु काम नाय, रोज एक नयो किस्सा सुनाबे बैठ जाओ, तिहाई भली चलाई। हमाए तो आफिस को टैम भयो जा रयो है, सो बाकी को कल सुनाइयो, भली। जैसे हम तो ठाले बैठे हते, हम पे कोई काम नाय, अरे बाबरो सबते मिलबो जुलबो चहिए, सब ते बात करो, बाकी सुनो अपनी सुनाओ, मन हल्को हे जाबे और कछु नाने, राम राम सबन कू।

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