Sunday, August 21, 2022

नौ दिन चले अढ़ाई कोस

 सफर जारी है...1033

23.08.2022

नौ दिन चले अढ़ाई कोस......

बिन्हेें नाय इंच भर सरकनो, नेकऊ नाय हिलनो अपने ठीया ते, अब नाय हिलनो तो नाय हिलनो साब, तुम कह कह के भले ही से आंती हे जाओ, बिनकी बला ते।पर बिनपे नेकऊ फरक नाय परि रयो। वे बैठे हैं कारो कम्बर ओढ़ के, मुंह हाथ सब ढाप के , कोई बिन्हे देख ना लेय।सारे कामचोर एक लंग ते पंगत में बैठे हैं, कछु काम की कहो तो ऐसे मिचमिचाएगे कि जाने कहा कटाह परि रई है, ऐसो मोड़ो सिकोड़ लिंगे कि जने का आफत आ गई है। सबरे एक ही थैली के चट्टा बट्टा हैं, तबही तो एक खोल में सिमटे बैठे हैं । सूप बोले तो बोले ,अब तो छलनी ऊ ही खूब बकर बकर करो करे, हां हां बा ही छलनी की बात कर रए हैं जामे बहत्तर छेद होय करें। एक ते कहो काम की तो सबरे एक संग से किल्लाबिंगे.... हम पे तो पहरे से ही निरे काम हैं, बिन्हेे करबो ही भारी पर रयो है और जे दो मन को बोझा और डाल दयो। चो भईया काम नाय करोगे तो का तुम्हें बिठा के पूजिंगे, आरती उतारंगे। हां नई तो, जब देखो तब अनक टोटी बात करिंगे।

काम करवे को ई तो आबत हों जां, बाही के धेला पइसा मिलते  तो काम करो तो करो नाय तो खूब घर बैठो आराम ते। कोई नाय कर रयो खुशामद। नखरा तो ऐसे दिखाएंगे कि हमारो निजी काम कर रए दीखें। अपनो कछु नाय करवा रए। नौकरी कर रए हो तो खूब करोगे, करनो पड़ेगो, बिना करे काऊ की नाय निठ रई, राजी राजी करो के गैर राजी करो।जायज़ बात  पे हू रायतो सो फैलात रैत हैं। अरे एक आध दिना की होय तो सबर हू कर लयो जाय, छूट हू दे दई जाए, नरमी बरत लई जाए। रोज रोज की को सुनेगो, कौन पे टाइम धरो है। सब काम बारे ई हते। इत्तो सारो काम बिखरो परो है बाय समेटे कि रोज रोज इन बाबरेन ने ई समझायो करें, इनते अटकबे में निरो टैम खराब हे जाबे। गुस्सा तो बहुत आबे पर छोटे बारे को खयाल कर चुप लगा जाबे। जो कहत नाय क्षमा बड़ेन को चहिए छोटन कू उत्पात। तो भईया छोटे बारे तो उत्पात ई मचाएंगे, तुम बनो बड़े , बिनकी गलती पर परदा डालत रयो। सो हम पे नाय होएगी साब, हम पे ना डालो जायगो परदा हमें तो सांच सांच सबरी बात कहबे की बीमारी है। हमपे सामने बारे ए धोखे में रखबो नाय आबे , हमाए तो खाबे और दिखाबे के दांत एक ई हते।गलती करोगे तो खूब ताल ठोक के कही जायेगी, अब तुम सबन ने बुरी लगे तो लगबो करे।

       अरे तो समझा समझा के आती हे गए, इनके भेजे में ई नाय बैठ  रई। सौ पोत कह दई होएगी कि लल्लू, लाली ध्यान ते काम करो करें, काम के बखत सबरो दिमाग काम में ई राखो। उधर उधर की बात मत सुनो। तिहायो ही काम बिगड़ेगो, हमें काय, हम कोई रोज रोज कहबे कू बैठे ई थोड़े रहिंगे। ए हम तो मर मरा  मुल्तान जानगे । हम कौन अमर मूल खाके आए हैं सो तुम्हें बैठ के समझात ई रिंगे। हम पे निरे काम डरे हैं, बिन्हेँ सिमटाबे के तुम से मगज खप्पी करें। जे रोज रोज की चिखचिख हमें पसंद नाय। करो तो करो नाय तो अपनो रस्तो देखो। बहुतेरे मिल जांगे। जैसो करोगे वैसो भरोगे। 

       हां नई तो, जब देखो तो कोई ना कोई बहानो ले के  बैठ जाएंगे कि आज जे हे गयो आज वो हे गयो। काम ते बचिबे कू कोई न कोई मूडो लगानो सिद्ध। बहुत चर लई हरी हरी, अब सूखी हू नाय मिल रई। काऊ धोखा में मत रहियो।  गुमान में फूले फूले डोल रए दीखो, खूब हवा भर रई दीखे, एक पिन चुबोबे की देर है, सब फुस्स है जाएगो गुब्बारो ।फिर तो रायतो अच्छी तरियां फैलेगो, हाल सिमट में नाय आ रयो ,समझ में भरी कि नाय कछु।

भौत है गई, ऊपर तक भर पाए, पानी सिर पे आ गयो,अब नाय चुप रहो जा रयो। के तो सीधी तरियां लेन पे आ जाओ नाय तो अब नाय पिल रई तिहाई। अपनी पे आ गए तो सब अक्क्ल ठिकाने ते लग जाएगी। भौत सियाहू सियाहु कर के देख लई  पर तुम नौ दिना में अढ़ाई कोस हू नाय चल पाए तो अब तुम पड़ो अगार पे और हम पीछे ही ठाढे हैं, देखे तो कितकू बच के जाओगे। अब खुल गए स्कूल, बालकन को एडमिशन वेडमीसन सब है हा गयो, अब लग जाओ पढ़ाबे ते। ऐसी  तरियां पढ़इयो कि सब समझ आ जाबे। तुम तो सबरे खूब काम करतो, तब ही तो जा स्कूल को खूब नाम हेबे। सो सुनी, अब दिक मत करियो बिलकुल। हमें डाटबे को कोई शौक नाने। सब मिल के काम करिंगे, सो ई झट सीना है जायगो। भली, अब काहू ए मौका मत दीयों कि सुननी पड़े नौ दिन चले अढ़ाई कोस। भली।

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