Thursday, September 15, 2022

सूरत का हिंदी मेला

 सफ़र जारी है....1057

15.09.2022

सूरत का हिंदी मेला......

हिंदी दिवस का पुण्य पर्व दो दिवसीय द्वितीय राजभाषा सम्मेलन के आयोजन के ब्याज से हिंदी की त्रिवेणी बही सूरत में। हां हां, वहीं सूरत जो गुजरात में है और जिस गुजरात ने शीर्षस्थ  नेतृत्व सहित सरदार बल्लभ भाई पटेल काका कालेलकर, महात्मा गांधी , दयानंद सरस्वती सदृश महापुरुष भारत को दिए हैं। लोग तो ये मुंह और मसूर की दाल पर कहने में जुटे थे कि ये सूरत और सूरत जाने का सपना पाले बैठे हैं जनाब। पर हिंदी के सम्मेलन किसी की सूरत पर थोड़े ही टिके होते हैं। वे तो सबके लिए सहृदय होते हैं, संवेदन शील होते हैं।हिंदी जन जन की भाषा है तो फिर आपकी सूरत ऐंचक बैंचक कैसी भी हो, वे आपकी सीरत देखते हैं और आपको आयोजन का हिस्सा बना ही लेते हैं फिर चाहें वक्ता हो ,श्रोता हो या दर्शक। मुख्य भूमिका में हों या सहायक, आप सम्मेलन के अनिवार्य हिस्से बन ही जाते हैं, अरे जब माननीय विद्वान बोलेंगे तो सुनने वाले भी तो चाहिए जो सुनकर जरुरी बातों को नोट कर उसे प्रसारित प्रचारित करें और अपने आचरण और व्यवहार में लाएं, उसे अपनी कार्य पद्धति में शामिल करें।

            हिंदी वालों के भाग से इस बार छींका सूरत में फूटा और हर तरह की सूरत वाले बन ठन कर सूरत पहुंच ही गए , उन्हें पहुंचना ही था क्योंकि हिंदी तुलसी की भवितव्यता की माफिक अपने चाहने वालों को, प्रेमियों को अपने पास बुला ही लेती है ... ताहि तहां ले जाए । फिर जो हिंदी के लिए दृढ़ संकल्पित होते हैं, वे तो किसी भी सूरत में सूरत पहुंच ही जाते हैं।ये जो हिंदी का मेला है, शिष्ट भाषा में इसे सम्मेलन कहा जाता है क्योंकि इस स्थल पर एक से सोच वालॉ और हिंदी के प्रचार प्रसार में लगे, उसके लिए पूर्णत समर्पित साधकों का सम्मिलन जो होता है। आयोजक मंडल तो अपने पूरे लाव लश्कर,सामान असबाब के साथ हफ्तों पहले से वहीं डेरा डाल देते हैं तब न आयोजन की इतनी दुरुस्त और चाक चौबंद व्यवस्था हम सब के लिए जुटा पाते हैं। और हम जैसे प्रतिभागी इलेवंथ आवर पहले भाग्मभाग करते ही सही,उड़नखटोला से  उतर सूरत मेले में सम्मिलित हो जाते हैं और सूरत की सूरत देख कर ही दम लेते हैं।

देखा तो सूरत बीस पच्चीस साल पहले भी था पर तब संदर्भ बाल गोपालों की पढ़ाई को लेकर था। इस बार हिंदी रंग में रंगे पगे और हिंदी भाव से भरे पूरे थे। तो और हिंदी इतनी गहरा रही थी, मन उछाह से बाबला हुआ जा रहा था कि अपने दल बल के साथ आ पहुंचे सूरत शहर में। 

 शहर सूरत की सूरत देखने में हमारी सूरत से क्या लेना देना था, वैसे भी कहन है नेक कामों में सूरत से कुछ नहीं होता, सीरत अच्छी होनी चाहिए। तो कुछ से सूरत यानि विशेष प्रभाव के साथ और कुछ अपनी सीरत के सर्टिफिकेट शो कर सूरत पहुंच गए। सभागार के मीलों आसपास विशाल जन समूह बिखरा था। सभी रंग बिरंगे परिधानों में अपने गले में परिचय पत्र लटकाए और प्रवेश पर्ची हाथ में पकड़े पंक्ति बद्ध खडे थे, बिल्कुल अनुशासित सिपाही की तरह। आख़िर ये सब हिंदी के योद्धा हैं जिन्हें शांति और गंभीरता के साथ पुरजोर तरीके से अपनी बात रखनी आती है। वे कहते कम करते अधिक हैं । उनका मानना है बात नहीं काम बोलता है। कितने कितने नए परिचय खाते में जुड़ गए, पटर पटर बोलने वाले, अपने को कुछ विशेष दिखाने वाले, बड़बोले टाइप और मौन हिंदी साधक जो स्वयं में ज्ञान आगार हैं, चलते फिरते पुस्तकालय हैं , सूचनाओं के अधिकृत स्रोत हैं।तो ऐसे हिंदी साधकों और हिंदी प्रेमियों से मिलना स्वाभाविक रुप से सुखद होता है। ऐसे मेले ठेलो में हिंदी प्रेमियों का जमावड़ा होता है, परिचय बढ़ता है, नई नई सूचनाएं मिलती है और आप भरे पूरे हो जाते हैं। आपस में हिंदी का सुख दुख बतरा लेते हैं, मन की कह सुन लेते हैं और हिंदी को शिखर पर ले जाने के रास्ते खोज लेते हैं। चिंतन मनन, आपसी वार्तालाप, और कहने सुनने से ही तो रास्ते निकलते हैं।

 पुस्तक प्रदर्शनी के ब्याज से अन्य प्रकाशनों, हिंदी के क्षेत्र में कार्यरत विभिन्न अनुशासनो की कार्य प्रकृति को दिखने का अवसर मिला। नया सीखने के मौके हर जगह होते हैं बस सीखने जानने का मानस बना रहे। माननीय राज्य शिक्षा मंत्री, राज्य गृह मंत्री और केन्द्रीय गृह मंत्री का केन्द्रीय हिंदी संस्थान के प्रकाशन स्टाल पर आना और हमारा उन्हें गुजराती, सौराष्ट्री , चरोत्तरी भाषा के अध्येता कोष भेंट कर पाना संस्थान को गौरव भाव से भर देता है। जहां हिन्दी है, हिंदी की बातें हैं, हिंदी के विषय में विचार विमर्श है, हिंदी की पड़ताल है, हिंदी के उज्ज्वल भविष्य के सपने हैं, हिंदी का गौरवशाली इतिहास और परंपरा है, वह स्थान हम हिंदी साधकों के लिए पुण्य भूमि ही है। सादर नमन वदन करते दूसरे दिन के कार्यक्रमों में भागीदार बनते हैं। जय हिंदी जय भारत के उद्घोष के साथ कामना है कि ये हिंदी मेले लगते रहें और हम आप सभी से पुन: पुन: मिलते रहें, सीखते सिखाते रहें।

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